पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
हबक्कूक
अध्याय 3
- Verse 1: शिग्योनीत की रीति पर हबक्कूक नबी की प्रार्थना।
- Verse 2: हे यहोवा, मैं तेरी कीर्ति सुनकर डर गया। हे यहोवा, वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर; इसी युग में तू उसको प्रगट कर; क्रोध करते हुए भी दया करना स्मरण कर।
- Verse 3: ईश्वर तेमान से आया, पवित्र ईश्वर परान पर्वत से आ रहा है। उसका तेज आकाश पर छाया हुआ है, और पृथ्वी उसकी स्तुति से परिपूर्ण हो गई है। (सेला)
- Verse 4: उसकी ज्योति सूर्य के तुल्य थी, उसके हाथ से किरणें निकल रही थीं; और इनमें उसका सामर्थ्य छिपा हुआ था।
- Verse 5: उसके आगे आगे मरी फैलती गई, और उसके पाँवों से महाज्वर निकलता गया।
- Verse 6: वह खड़ा होकर पृथ्वी को नाप रहा था; उसने देखा और जाति जाति के लोग घबरा गए; तब सनातन पर्वत चकनाचूर हो गए, और सनातन की पहाड़ियाँ झुक गईं। उसकी गति अनन्त काल से एक सी है।
- Verse 7: मुझे कूशान के तम्बू में रहनेवाले दु:ख से दबे दिखाई पड़े; और मिद्यान देश के डेरे डगमगा गए।
- Verse 8: हे यहोवा, क्या तू नदियों पर रिसियाया था? क्या तेरा क्रोध नदियों पर भड़का था, अथवा क्या तेरी जलजलाहट समुद्र पर भड़की थी, जब तू अपने घोड़ों पर और उद्धार करनेवाले विजयी रथों पर चढ़कर आ रहा था?
- Verse 9: तेरा धनुष खोल में से निकल गया, तेरे दण्ड का वचन शपथ के साथ हुआ था। (सेला) तू ने धरती को नदियों से चीर डाला।
- Verse 10: पहाड़ तुझे देखकर काँप उठे; आँधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात् लहरों को ऊपर उठाया।
- Verse 11: तेरे उड़नेवाले तीरों के चलने की ज्योति से, और तेरे चमकीले भाले की झलक के प्रकाश से सूर्य और चन्द्रमा अपने अपने स्थान पर ठहर गए।
- Verse 12: तू क्रोध में आकर पृथ्वी पर चल निकला, तू ने जाति जाति को क्रोध से नष्ट किया।
- Verse 13: तू अपनी प्रजा के उद्धार के लिये निकला, हाँ, अपने अभिषिक्त के संग होकर उद्धार के लिये निकला। तू ने दुष्ट के घर के सिर को कुचल कर उसे गले से नींव तक नंगा कर दिया। (सेला)
- Verse 14: तू ने उसके योद्धाओं के सिरों को उसी की बर्छी से छेदा है, वे मुझ को तितर–बितर करने के लिये बवण्डर की आँधी के समान आए, और दीन लोगों को घात लगाकर मार डालने की आशा से आनन्दित थे।
- Verse 15: तू अपने घोड़ों पर सवार होकर समुद्र से हाँ, जलप्रलय से पार हो गया।
- Verse 16: यह सब सुनते ही मेरा कलेजा काँप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे, मेरी हड्डियाँ सड़ने लगीं, और मैं खड़े खड़े काँपने लगा। मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूँगा जब दल बाँधकर प्रजा चढ़ाई करे।
- Verse 17: क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़–बकरियाँ न रहें, और न थानों में गाय बैल हों,
- Verse 18: तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूँगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूँगा।
- Verse 19: यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पाँव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊँचे स्थानों पर चलाता है। (प्रधान बजानेवालों के लिये मेरे तारवाले बाजों के साथ)