यह सब सुनते ही मेरा कलेजा काँप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे, मेरी हड्डियाँ सड़ने लगीं, और मैं खड़े खड़े काँपने लगा। मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूँगा जब दल बाँधकर प्रजा चढ़ाई करे।