पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
यशायाह
अध्याय 33
- Verse 1: हाय तुझ नाश करनेवाले पर जो नाश नहीं किया गया था; हाय तुझ विश्वासघाती पर, जिसके साथ विश्वासघात नहीं किया गया। जब तू नाश कर चुके, तब तू नाश किया जाएगा; और जब तू विश्वासघात कर चुके, तब तेरे साथ विश्वासघात किया जाएगा।
- Verse 2: हे यहोवा, हम लोगों पर अनुग्रह कर; हम तेरी ही बाट जोहते हैं। भोर को तू उनका भुजबल, संकट के समय हमारा उद्धारकर्ता ठहर।
- Verse 3: हुल्लड़ सुनते ही देश देश के लोग भाग गए, तेरे उठने पर अन्यजातियाँ तितर–बितर हुईं।
- Verse 4: जैसे टिड्डियाँ चट करती हैं, वैसे ही तुम्हारी लूट चट की जाएगी, और जैसे टिड्डियाँ टूट पड़ती हैं, वैसे ही वे उस पर टूट पड़ेंगे।
- Verse 5: यहोवा महान् हुआ है, वह ऊँचे पर रहता है; उस ने सिय्योन को न्याय और धर्म से परिपूर्ण किया है;
- Verse 6: और उद्धार, बुद्धि और ज्ञान की बहुतायत तेरे दिनों का आधार होगी; यहोवा का भय उसका धन होगा।
- Verse 7: देख, उनके शूरवीर बाहर चिल्ला रहे हैं, संधि के दूत बिलख बिलखकर रो रहे हैं।
- Verse 8: राजमार्ग सुनसान पड़े हैं, उन पर यात्री अब नहीं चलते। उसने वाचा को टाल दिया, नगरों को तुच्छ जाना, उसने मनुष्य को कुछ न समझा।
- Verse 9: पृथ्वी विलाप करती और मुर्झा गई है; लबानोन कुम्हला गया और उस पर सियाही छा गई है; शारोन मरुभूमि के समान हो गया; बाशान और कर्मेल में पतझड़ हो रहा है।
- Verse 10: यहोवा कहता है, अब मैं उठूँगा, मैं अपना प्रताप दिखाऊँगा; अब मैं महान् ठहरूँगा।
- Verse 11: तुम में सूखी घास का गर्भ ठहरेगा, तुम से भूसी उत्पन्न होगी; तुम्हारी साँस आग है जो तुम्हें भस्म करेगी।
- Verse 12: देश देश के लोग फूँके हुए चूने के समान हो जाएँगे, और कटे हुए कटीले पेड़ों के समान आग में जलाए जाएँगे।
- Verse 13: हे दूर दूर के लोगो, सुनो कि मैं ने क्या किया है? और तुम भी जो निकट हो, मेरा पराक्रम जान लो।
- Verse 14: सिय्योन के पापी थरथरा गए हैं : भक्तिहीनों को कँपकँपी लगी है : हम में से कौन प्रचण्ड आग में रह सकता? हम में से कौन उस आग में बना रह सकता है जो कभी न बुझेगी?
- Verse 15: जो धर्म से चलता और सीधी बातें बोलता, जो अन्धेर के लाभ से घृणा करता, जो घूस नहीं लेता; जो खून की बात सुनने से कान बन्द करता, और बुराई देखने से आँख मूँद लेता है। वही ऊँचे स्थानों में निवास करेगा।
- Verse 16: वह चट्टानों के गढ़ों में शरण लिये हुए रहेगा; उसको रोटी मिलेगी और पानी की घटी कभी न होगी।
- Verse 17: तू अपनी आँखों से राजा को उसकी शोभा सहित देखेगा; और लम्बे चौड़े देश पर दृष्टि करेगा।
- Verse 18: तू भय के दिनों को स्मरण करेगा : लेखा लेनेवाला और कर तौल कर लेनेवाला कहाँ रहा? गुम्मटों का गिननेवाला कहाँ रहा?
- Verse 19: जिनकी कठिन भाषा तू नहीं समझता, और जिनकी लडखड़ाती जीभ की बात तू नहीं बूझ सकता उन निर्दयी लोगों को तू फिर न देखेगा।
- Verse 20: हमारे पर्व के नगर सिय्योन पर दृष्टि कर! तू अपनी आँखों से यरूशलेम को देखेगा, वह विश्राम का स्थान, और ऐसा तम्बू है जो कभी गिराया नहीं जाएगा, जिसका कोई खूँटा कभी उखाड़ा न जाएगा, और न कोई रस्सी कभी टूटेगी।
- Verse 21: वहाँ महाप्रतापी यहोवा हमारे लिये रहेगा, वह बहुत बड़ी बड़ी नदियों और नहरों का स्थान होगा, जिसमें डाँडवाली नाव न चलेगी और न शोभायमान जहाज उसमें होकर जाएगा।
- Verse 22: क्योंकि यहोवा हमारा न्यायी, यहोवा हमारा हाकिम, यहोवा हमारा राजा है, वही हमारा उद्धार करेगा।
- Verse 23: तेरी रस्सियाँ ढीली हो गईं, वे मस्तूल की जड़ को दृढ़ न रख सकीं, और न पाल को तान सकीं। तब बड़ी लूट छीनकर बाँटी गई, लँगड़े लोग भी लूट के भागी हुए।
- Verse 24: कोई निवासी न कहेगा कि मैं रोगी हूँ; और जो लोग उसमें बसेंगे, उनका अधर्म क्षमा किया जाएगा।