पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
1 राजाओं
अध्याय 5
- Verse 1: सोर के राजा हीराम ने अपने दूत सुलैमान के पास भेजे, क्योंकि उसने सुना था, कि वह अभिषिक्त होकर अपने पिता के स्थान पर राजा हुआ है : और दाऊद के जीवन भर हीराम उसका मित्र बना रहा।
- Verse 2: सुलैमान ने हीराम के पास यों कहला भेजा, “तुझे मालूम है,
- Verse 3: कि मेरा पिता दाऊद अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन इसलिये न बनवा सका कि वह चारों ओर लड़ाइयों में तब तक उलझा रहा, जब तक यहोवा ने उसके शत्रुओं को उसके पाँव तले न कर दिया।
- Verse 4: परन्तु अब मेरे परमेश्वर यहोवा ने मुझे चारों ओर से विश्राम दिया है; अब न तो कोई विरोधी है, और न कुछ विपत्ति देख पड़ती है।
- Verse 5: मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनवाने की ठान रखी है अर्थात् उस बात के अनुसार जो यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कही थी, ‘तेरा पुत्र जिसे मैं तेरे स्थान में गद्दी पर बैठाऊँगा, वही मेरे नाम का भवन बनवाएगा।’
- Verse 6: इसलिये अब तू मेरे लिये लबानोन पर से देवदारु काटने की आज्ञा दे, और मेरे दास तेरे दासों के संग रहेंगे, और जो कुछ मज़दूरी तू ठहराए, वही मैं तुझे तेरे दासों के लिये दूँगा; तुझे मालूम है कि सीदोनियों के बराबर लकड़ी काटने का भेद हम लोगों में से कोई भी नहीं जानता।”
- Verse 7: सुलैमान की ये बातें सुनकर, हीराम बहुत आनन्दित हुआ, और कहा, “आज यहोवा धन्य है, जिसने दाऊद को उस बड़ी जाति पर राज्य करने के लिये एक बुद्धिमान पुत्र दिया है।”
- Verse 8: तब हीराम ने सुलैमान के पास यों कहला भेजा, “जो तू ने मेरे पास कहला भेजा है वह मेरी समझ में आ गया, देवदारु और सनोवर की लकड़ी के विषय जो कुछ तू चाहे, वही मैं करूँगा।
- Verse 9: मेरे दास लकड़ी को लबानोन से समुद्र तक पहुँचाएँगे, फिर मैं उनके बेड़े बनवाकर, जो स्थान तू मेरे लिये ठहराए, वहीं पर समुद्र के मार्ग से उनको पहुँचवा दूँगा : वहाँ मैं उनको खोलकर डलवा दूँगा, और तू उन्हें ले लेना : और तू मेरे परिवार के लिये भोजन देकर, मेरी भी इच्छा पूरी करना।”
- Verse 10: इस प्रकार हीराम सुलैमान की इच्छा के अनुसार उसको देवदारु और सनोवर की लकड़ी देने लगा,
- Verse 11: और सुलैमान ने हीराम के परिवार के खाने के लिये उसे बीस हज़ार कोर गेहूँ और बीस कोर* पेरा हुआ तेल दिया; इस प्रकार सुलैमान हीराम को प्रति वर्ष दिया करता था।
- Verse 12: यहोवा ने सुलैमान को अपने वचन के अनुसार बुद्धि दी, और हीराम और सुलैमान के बीच मेल बना रहा वरन् उन दोनों ने आपस में वाचा भी बाँध ली।
- Verse 13: राजा सुलैमान ने पूरे इस्राएल में से तीस हज़ार पुरुष बेगार पर लगाए,
- Verse 14: और उन्हें लबानोन पहाड़ पर पारी पारी करके, महीने महीने दस हज़ार भेज दिया करता था और एक महीना वे लबानोन पर, और दो महीने घर पर रहा करते थे; और बेगारियों के ऊपर अदोनीराम ठहराया गया।
- Verse 15: सुलैमान के सत्तर हज़ार बोझ ढोनेवाले और पहाड़ पर अस्सी हज़ार वृक्ष काटनेवाले और पत्थर निकालनेवाले थे।
- Verse 16: इनको छोड़ सुलैमान के तीन हज़ार तीन सौ मुखिये थे, जो काम करनेवालों के ऊपर थे।
- Verse 17: फिर राजा की आज्ञा से बड़े बड़े अनमोल पत्थर इसलिये खोदकर निकाले गए कि भवन की नींव, गढ़े हुए पत्थरों से डाली जाए।
- Verse 18: अत: सुलैमान के कारीगरों और हीराम के कारीगरों और गबालियों ने उनको गढ़ा, और भवन के बनाने के लिये लकड़ी और पत्थर तैयार किए।