लम्बी साँसें ले तो ले, परन्तु वे सुनाई न पड़ें; मरे हुओं के लिये भी विलाप न करना। सिर पर पगड़ी बाँधे और पाँवों में जूती पहिने रहना; और न तो अपने होंठ को ढाँपना न शोक के योग्य रोटी खाना।”