विवाह करके बेटे–बेटियाँ जन्माओ; और अपने बेटों के लिये स्त्रियाँ ब्याह लो और अपनी बेटियाँ पुरुषों को ब्याह दो, कि वे भी बेटे–बेटियाँ जन्माएँ; और वहाँ घटो नहीं वरन् बढ़ते जाओ।