“ ‘मैं ने सोचा था, मैं कैसे तुझे लड़कों में गिनकर वह मनभावना देश दूँ जो सब जातियों के देशों का शिरोमणि है। मैं ने सोचा कि तू मुझे पिता कहेगी, और मुझ से फिर न भटकेगी।