वे पहाड़ों के मांसाहारी पक्षियों और वन–पशुओं के लिये इकट्ठे पड़े रहेंगे। मांसाहारी पक्षी तो उनको नोचते–नोचते धूपकाल बिताएँगे, और सब भाँति के वनपशु उनको खाते खाते* जाड़ा काटेंगे।