चाहे उसके निवासियों का दसवाँ अंश भी रह जाए, तौभी वह नष्ट किया जाएगा, परन्तु जैसे छोटे या बड़े बांजवृक्ष को काट डालने पर भी उसका ठूँठ बना रहता है, वैसे ही पवित्र वंश उसका ठूँठ रहेगा।”