हे मेरे प्राणप्रिय, मुझे बता, तू अपनी भेड़–बकरियाँ कहाँ चराता है, दोपहर को तू उन्हें कहाँ बैठाता है; मैं क्यों तेरे संगियों की भेड़–बकरियों के पास घूँघट काढ़े हुए भटकती फिरूँ?