बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली में परमेश्वर के सामने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में है और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।