यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है कि मैं कैसे भीड़ के संग जाया करता था; मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था।