क्योंकि मैं और मेरी जाति के लोग बेच डाले गए हैं, और हम सब घात और नष्ट किए जानेवाले हैं। यदि हम केवल दास–दासी हो जाने के लिये बेच डाले जाते, तो मैं चुप रहती; चाहे उस दशा में वह विरोधी राजा की हानि भर न सकता।”