परन्तु हमारा और हमारे भाइयों का शरीर और हमारे और उनके बच्चे एक ही समान हैं, तौभी हम अपने बेटे–बेटियों को दास बनाते हैं; वरन् हमारी कोई कोई बेटी दासी भी हो चुकी है; और हमारा कुछ बस नहीं चलता, क्योंकि हमारे खेत और दाख की बारियाँ दूसरों के हाथ पड़ी हैं।”
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