परन्तु बहुतेरे याजक और लेवीय और पूर्वजों के घरानों के मुख्य पुरुष, अर्थात् वे बूढ़े जिन्होंने पहला भवन देखा था, जब इस भवन की नींव उनकी आँखों के सामने पड़ी तब वे फूट फूटकर रोने लगे, और बहुतेरे आनन्द के मारे ऊँचे शब्द से जय जयकार कर रहे थे।
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