हिजकिय्याह ने याजकों के दलों को और लेवियों को वरन् याजकों और लेवियों दोनों को, उनके दल के अनुसार और एक एक मनुष्य को उसकी सेवा के अनुसार इसलिये ठहरा दिया, कि वे यहोवा की छावनी के द्वारों के भीतर होमबलि, मेलबलि, सेवा–टहल, धन्यवाद और स्तुति किया करें।
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