फिर अबशालोम यह भी कहा करता था, “भला होता कि मैं इस देश में न्यायी ठहराया जाता! तब जितने मुक़द्दमावाले होते वे सब मेरे ही पास आते, और मैं उनका न्याय चुकाता।”