पाँचवें दिन भोर को वह विदा होने को सबेरे उठा; परन्तु स्त्री के पिता ने कहा, “अपना जी ठण्डा कर, और तुम दोनों दिन ढलने तक रुके रहो।” तब उन दोनों ने रोटी खाई।