जब उनका मन मगन हो गया, तब उन्हों ने कहा, “शिमशोन को बुलवा लो कि वह हमारे लिये तमाशा करे।” इसलिये शिमशोन बन्दीगृह में से बुलवाया गया, और उनके लिये तमाशा करने लगा, और खम्भों के बीच खड़ा कर दिया गया।