उसके पास कुछ मनुष्य कोठरी में घात लगाए बैठे थे। तब उसने उस से कहा, “हे शिमशोन, पलिश्ती तेरी घात में हैं!” तब उसने ताँतों को ऐसा तोड़ा जैसा सन का सूत आग से छूते ही टूट जाता है। और उसके बल का भेद न खुला।