तब इस्राएली याकानियों के कुँओं से कूच करके मोसेरा तक आए। वहाँ हारून मर गया, और उसको वहीं मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र एलीआज़ार उसके स्थान पर याजक का काम करने लगा।