जितने दिन तक वह व्याधि उसमें रहे उतने दिन तक वह अशुद्ध रहेगा; और वह अशुद्ध ठहरा रहे; इसलिये वह अकेला रहा करे, उसका निवास स्थान छावनी के बाहर हो।