ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
,
पुराना नियम
,
सभोपदेशक
,
अध्याय 4
,
ವಚನ 18
और “यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनाई से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना?”
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