तो तू अपने स्वर्गीय निवास–स्थान में से सुनकर क्षमा करना, और ऐसा करना, कि एक एक के मन को जानकर उसकी समस्त चाल के अनुसार उसको फल देना : तू ही तो सब मनुष्यों के मन के भेदों का जानने वाला है।