और अपने इस पर्व में अपने अपने बेटे–बेटियों, दास–दासियों समेत तू और जो लेवीय, और परदेशी, और अनाथ, और विधवाएँ तेरे फाटकों के भीतर हों वे भी आनन्द करें।