फिर अपने अन्न, या नये दाखमधु, या टटके तेल का दशमांश, और अपने गाय–बैलों, या भेड़–बकरियों के पहिलौठे, और अपनी मन्नतों की कोई वस्तु, और अपने स्वेच्छाबलि, और उठाई हुई भेंटें अपने सब फाटकों के भीतर न खाना;