ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
,
पुराना नियम
,
व्यवस्थाविवरण
,
अध्याय 27
,
ವಚನ 19
‘शापित हो वह जो परदेशी, अनाथ, या विधवा का न्याय बिगाड़े।’ तब सब लोग कहें, ‘आमीन।’
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