उपद्रव बढ़ते बढ़ते दुष्टता का दण्ड बन गया; उन में से कोई न बचेगा, और न उनकी भीड़–भाड़, न उनके धन में से कुछ रहेगा; और न उन में से किसी के लिये विलाप सुनाई पड़ेगा।