“हे भोले लोगो, तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोगे? हे ठट्ठा करनेवालो, तुम कब तक ठट्ठा करने से प्रसन्न रहोगे? हे मूर्खो, तुम कब तक ज्ञान से बैर रखोगे?