उन दिनों जो सम्मति अहीतोपेल देता था, वह ऐसी होती थी कि मानो कोई परमेश्वर का वचन पूछ लेता हो। अहीतोपेल चाहे दाऊद को चाहे अबशालोम को, जो जो सम्मति देता वह ऐसी ही होती थी।