किन्तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह आवश्यक नहीं कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूँ, क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है;