इसलिये मैं ने भाइयों से यह विनती करना आवश्यक समझा कि वे पहले से तुम्हारे पास जाएँ, और तुम्हारी उदारता का फल जिसके विषय में पहले से वचन दिया गया था, तैयार कर रखें कि यह दबाव से नहीं परन्तु उदारता के फल के समान तैयार हो।