अर्थात् बड़ी दीनता से, और आँसू बहा–बहाकर, और उन परीक्षाओं में जो यहूदियों के षड्यन्त्र के कारण मुझ पर आ पड़ी, मैं प्रभु की सेवा करता ही रहा;