इस पर सब लोग आश्चर्य करते हुए आपस में वाद–विवाद करने लगे, “यह क्या बात है? यह तो कोई नया उपदेश है! वह अधिकार के साथ अशुद्ध आत्माओं को भी आज्ञा देता है, और वे उसकी आज्ञा मानती हैं।”