पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 135
- Verse 1: याह की स्तुति करो, यहोवा के नाम की स्तुति करो, हे यहोवा के सेवको, तुम स्तुति करो,
- Verse 2: तुम जो यहोवा के भवन में, अर्थात् हमारे परमेश्वर के भवन के आंगनों में खड़े रहते हो!
- Verse 3: याह की स्तुति करो*, क्योंकि यहोवा भला है; उसके नाम का भजन गाओ, क्योंकि यह मनोहर है!
- Verse 4: याह ने तो याकूब को अपने लिये चुना है, अर्थात् इस्राएल को अपना निज धन होने के लिये चुन लिया है।
- Verse 5: मैं तो जानता हूँ कि हमारा प्रभु यहोवा सब देवताओं से महान् है।
- Verse 6: जो कुछ यहोवा ने चाहा उसे उसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और सब गहिरे स्थानों में किया है।
- Verse 7: वह पृथ्वी की छोर से कुहरे उठाता है, और वर्षा के लिये बिजली बनाता है, और पवन को अपने भण्डार में से निकालता है।
- Verse 8: उसने मिस्र में क्या मनुष्य क्या पशु, सब के पहिलौठों को मार डाला!
- Verse 9: हे मिस्र, उसने तेरे बीच में फ़िरौन और उसके सब कर्मचारियों के बीच चिह्न और चमत्कार किए।
- Verse 10: उसने बहुत सी जातियाँ नष्ट कीं, और सामर्थी राजाओं को,
- Verse 11: अर्थात् एमोरियों के राजा सीहोन को, और बाशान के राजा ओग को, और कनान के सब राजाओं को घात किया;
- Verse 12: और उनके देश को बाँटकर, अपनी प्रजा इस्राएल का भाग होने के लिये दे दिया।
- Verse 13: हे यहोवा, तेरा नाम सदा स्थिर है, हे यहोवा, जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी–पीढ़ी बना रहेगा।
- Verse 14: यहोवा तो अपनी प्रजा का न्याय चुकाएगा, और अपने दासों की दुर्दशा देखकर तरस खाएगा।
- Verse 15: अन्यजातियों की मूरतें सोना–चाँदी ही हैं, वे मनुष्यों की बनाई हुई हैं।
- Verse 16: उनके मुँह तो रहता है, परन्तु वे बोल नहीं सकतीं, उनके आँखें तो रहती हैं, परन्तु वे देख नहीं सकतीं,
- Verse 17: उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं, न उनके कुछ भी साँस चलती है।
- Verse 18: जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनानेवाले भी हैं; और उन पर सब भरोसा रखनेवाले भी वैसे ही हो जाएँगे!
- Verse 19: हे इस्राएल के घराने, यहोवा को धन्य कह! हे हारून के घराने, यहोवा को धन्य कह!
- Verse 20: हे लेवी के घराने, यहोवा को धन्य कह! हे यहोवा के डरवैयो, यहोवा को धन्य कहो!
- Verse 21: यहोवा जो यरूशलेम में वास करता है, उसे सिय्योन में धन्य कहा जावे! याह की स्तुति करो!