ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
अय्यूब
अध्याय 18
2 : “तुम कब तक फन्दे लगा लगाकर वचन पकड़ते रहोगे? चित्त लगाओ, तब हम बोलेंगे।
3 : हम लोग तुम्हारी दृष्टि में क्यों पशु के तुल्य समझे जाते, और अशुद्ध ठहरे हैं।
4 : हे अपने को क्रोध में फाड़नेवाले क्या तेरे निमित्त पृथ्वी उजड़ जाएगी, और चट्टान अपने स्थान से हट जाएगी?
5 : “निश्चय दुष्टों का दीपक बुझ जाएगा, और उसकी आग की लौ न चमकेगी।
6 : उसके डेरे में का उजियाला अन्धेरा हो जाएगा, और उसके ऊपर का दिया बुझ जाएगा।
7 : उसके बड़े बड़े डग छोटे हो जाएँगे, और वह अपनी ही युक्ति के द्वारा गिरेगा।
8 : वह अपना ही पाँव जाल में फँसाएगा, वह फन्दों पर चलता है।
9 : उसकी एड़ी फन्दे में फँस जाएगी, और वह जाल में पकड़ा जाएगा।
10 : फन्दे की रस्सियाँ उसके लिये भूमि में, और जाल रास्ते में छिपा दिया गया है।
11 : चारों ओर से डरावनी वस्तुएँ उसे डराएँगी और उसके पीछे पड़कर उसको भगाएँगी।
12 : उसका बल दु:ख से घट जाएगा, और विपत्ति उसके पास ही तैयार रहेगी।
13 : वह उसके अंग को खा जाएगी, वरन् काल का पहिलौठा उसके अंगों को खा लेगा।
14 : अपने जिस डेरे का भरोसा वह करता है, उससे वह छीन लिया जाएगा; और वह भयंकरता के राजा के पास पहुँचाया जाएगा।
15 : जो उसके यहाँ का नहीं है वह उसके डेरे में वास करेगा, और उसके घर पर गन्धक छितराई जाएगी।
16 : उसकी जड़ सूख जाएगी, और डालियाँ कट जाएँगी।
17 : पृथ्वी पर से उसका स्मरण मिट जाएगा, और बाजार में उसका नाम कभी न सुन पड़ेगा।
18 : वह उजियाले से अन्धियारे में ढकेल दिया जाएगा, और जगत में से भी भगाया जाएगा।
19 : उसके कुटुम्बियों में उसके कोई पुत्र–पौत्र न रहेगा, और जहाँ वह रहता था, वहाँ कोई बचा न रहेगा।
20 : उसका दिन देखकर पश्चिम के लोग चकित होंगे, और पूरब के निवासियों के रोएँ खड़े हो जाएँगे।
21 : नि:सन्देह कुटिल लोगों के निवास ऐसे हो जाते हैं, और जिसको परमेश्वर का ज्ञान नहीं रहता उसका स्थान ऐसा ही हो जाता है।”