పరిశుద్ధ గ్రంథము
पुराना नियम
नीतिवचन
अध्याय 2
1 : हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,
2 : और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगाकर सोचे;
3 : और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे,
4 : और उसको चाँदी के समान ढूँढ़े, और गुप्त धन के समान उसकी खोज में लगा रहे;
5 : तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा।
6 : क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुँह से निकलती हैं।
7 : वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है।
8 : वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है।
9 : तब तू धर्म और न्याय, और निष्पक्षता को, अर्थात् सब भली–भली चाल को समझ सकेगा।
10 : क्योंकि बुद्धि तो तेरे हृदय में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तुझे सुख देनेवाला लगेगा;
11 : विवेक तुझे सुरक्षित रखेगा; और समझ तेरी रक्षक होगी;
12 : ताकि तुझे बुराई के मार्ग से, और उलट–फेर की बातों के कहनेवालों से बचाए,
13 : जो खराई के मार्ग को छोड़ देते हैं, ताकि अन्धेरे मार्ग में चलें;
14 : जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्ट जन की उलट–फेर की बातों में मगन रहते हैं,
15 : जिनकी चालचलन टेढ़ी–मेढ़ी और जिनके मार्ग बिगड़े हुए हैं।
16 : तब तू पराई स्त्री से भी बचेगा जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है,
17 : और अपनी जवानी के साथी को छोड़ देती, और जो अपने परमेश्वर की वाचा को भूल जाती है।
18 : उसका घर मृत्यु की ढलान पर है, और उसकी डगरें मरे हुओं के बीच पहुँचाती हैं;
19 : जो उसके पास जाते हैं, उनमें से कोई भी लौटकर नहीं आता; और न वे जीवन का मार्ग पाते हैं।
20 : तू भले मनुष्यों के मार्ग में चल, और धर्मियों के पथ को पकड़े रह।
21 : क्योंकि धर्मी लोग देश में बसे रहेंगे, और खरे लोग ही उस में बने रहेंगे।
22 : दुष्ट लोग देश में से नष्ट होंगे, और विश्वासघाती उसमें से उखाड़े जाएँगे।