पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
अय्यूब
अध्याय 19
2 : “तुम कब तक मेरे प्राण को दु:ख देते रहोगे; और बातों से मुझे चूर चूर करोगे?
3 : इन दसों बार तुम लोग मेरी निन्दा ही करते रहे, तुम्हें लज्जा नहीं आती कि तुम मेरे साथ कठोरता का बरताव करते हो?
4 : मान लिया कि मुझ से भूल हुई, तौभी वह भूल तो मेरे ही सिर पर रहेगी।
5 : यदि तुम सचमुच मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई करते हो और प्रमाण देकर मेरी निन्दा करते हो,
6 : तो यह जान लो कि परमेश्वर ने मुझे गिरा दिया है, और मुझे अपने जाल में फँसा लिया है।
7 : देखो, मैं उपद्रव! उपद्रव! यों चिल्लाता रहता हूँ, परन्तु कोई नहीं सुनता; मैं सहायता के लिये दोहाई देता रहता हूँ, परन्तु कोई न्याय नहीं करता।
8 : उसने मेरे मार्ग को ऐसा रूंधा है कि मैं आगे चल नहीं सकता, और मेरी डगरें अन्धेरी कर दी हैं।
9 : मेरा वैभव उसने हर लिया है, और मेरे सिर पर से मुकुट उतार दिया है।
10 : उसने चारों ओर से मुझे तोड़ दिया, बस मैं जाता रहा, और मेरी आशा को उसने वृक्ष के समान उखाड़ डाला है।
11 : उसने मुझ पर अपना क्रोध भड़काया है और अपने शत्रुओं में मुझे गिनता है।
12 : उसके दल इकट्ठे होकर मेरे विरुद्ध मोर्चा बाँधते हैं, और मेरे डेरे के चारों ओर छावनी डालते हैं।
13 : “उसने मेरे भाइयों को मुझ से दूर किया है, और जो मेरी जान पहचान के थे, वे बिलकुल अनजान हो गए हैं।
14 : मेरे कुटुंबी मुझे छोड़ गए हैं, और मेरे परम मित्र मुझे भूल गए हैं।
15 : जो मेरे घर में रहा करते थे, वे, वरन् मेरी दासियाँ भी मुझे अनजाना गिनने लगी हैं। उनकी दृष्टि में मैं परदेशी हो गया हूँ।
16 : जब मैं अपने दास को बुलाता हूँ, तब वह नहीं बोलता; मुझे उससे गिड़गिड़ाना पड़ता है।
17 : मेरी साँस मेरी स्त्री को और मेरी गन्ध मेरे भाइयों की दृष्टि में घिनौनी लगती है।
18 : लड़के भी मुझे तुच्छ जानते हैं; और जब मैं उठने लगता तब वे मेरे विरुद्ध बोलते हैं।
19 : मेरे सब परम मित्र मुझ से द्वेष रखते हैं, और जिन से मैं ने प्रेम किया वे पलटकर मेरे विरोधी हो गए हैं।
20 : मेरी खाल और मांस मेरी हड्डियों से सट गए हैं, और मैं मृत्यु से बाल–बाल बच गया हूँ।
21 : हे मेरे मित्रो! मुझ पर दया करो, दया, क्योंकि परमेश्वर ने मुझे मारा है।
22 : तुम परमेश्वर के समान क्यों मेरे पीछे पड़े हो? तुम मेरे मांस से क्यों तृप्त नहीं हुए?
23 : “भला होता, कि मेरी बातें लिखी जातीं; भला होता, कि वे पुस्तक में लिखी जातीं,
24 : और लोहे की टाँकी और सीसे से वे सदा के लिये चट्टान पर खोदी जातीं।
25 : मुझे तो निश्चय है कि मेरा छुड़ानेवाला जीवित है, और वह अन्त में पृथ्वी पर खड़ा होगा;
26 : और अपनी खाल के इस प्रकार नष्ट हो जाने के बाद भी, मैं शरीर में होकर परमेश्वर का दर्शन पाऊँगा।
27 : उसका दर्शन मैं आप अपनी आँखों से अपने लिये करूँगा, और कोई दूसरा नहीं। यद्यपि मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर चूर चूर भी हो जाए,
28 : तौभी मुझ में तो धर्म का मूल पाया जाता है! और तुम जो कहते हो हम इसको कैसे सताएँ!
29 : तो तुम तलवार से डरो, क्योंकि क्रोध का परिणाम तलवार का दण्ड है, जिससे तुम जान लो कि न्याय होता है।”