ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
भजन संहिता
अध्याय 145
- Verse 1: हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूँगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूँगा।
- Verse 2: प्रतिदिन मैं तुझ को धन्य कहा करूँगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूँगा।
- Verse 3: यहोवा महान् और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है।
- Verse 4: तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा।
- Verse 5: मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भाँति भाँति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूँगा।
- Verse 6: लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूँगा।
- Verse 7: लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण करके उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे।
- Verse 8: यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करनेवाला और अति करुणामय है।
- Verse 9: यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है।
- Verse 10: हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे!
- Verse 11: वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे;
- Verse 12: कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें।
- Verse 13: तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी।
- Verse 14: यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है।
- Verse 15: सभों की आँखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उनको आहार समय पर देता है।
- Verse 16: तू अपनी मुट्ठी खोलकर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है।
- Verse 17: यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करुणामय है।
- Verse 18: जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात् जितने उसको सच्चाई से पुकारते हैं, उन सभों के वह निकट रहता है।
- Verse 19: वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, और उनकी दोहाई सुनकर उनका उद्धार करता है।
- Verse 20: यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों का सत्यानाश करता है।
- Verse 21: मैं यहोवा की स्तुति करूँगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।