ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
लैव्यव्यवस्था
अध्याय 22
- Verse 1: फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 2: “हारून और उसके पुत्रों से कह कि इस्राएलियों की पवित्र की हुई वस्तुओं से जिनको वे मेरे लिये पवित्र करते हैं अलग रहें, और मेरे पवित्र नाम को अपवित्र न करें; मैं यहोवा हूँ।
- Verse 3: और उनसे कह कि तुम्हारी पीढ़ी–पीढ़ी में तुम्हारे सारे वंश में से जो कोई अपनी अशुद्धता की दशा में उन पवित्र की हुई वस्तुओं के पास जाए, जिन्हें इस्राएली यहोवा के लिये पवित्र करते हैं, वह प्राणी मेरे सामने से नाश किया जाएगा; मैं यहोवा हूँ।
- Verse 4: हारून के वंश में से कोई क्यों न हो जो कोढ़ी हो, या उसके प्रमेह हो, वह मनुष्य जब तक शुद्ध न हो जाए तब तक पवित्र की हुई वस्तुओं में से कुछ न खाए। जो लोथ के कारण अशुद्ध हुआ हो, या जिसका वीर्य स्खलित हुआ हो, ऐसे मनुष्य को जो कोई छूए,
- Verse 5: और जो कोई किसी ऐसे रेंगनेहारे जन्तु को छूए जिससे लोग अशुद्ध हो सकते हैं, या किसी ऐसे मनुष्य को छूए जिसमें किसी प्रकार की अशुद्धता हो जो उसको भी लग सकती है
- Verse 6: तो वह प्राणी जो इनमें से किसी को छूए साँझ तक अशुद्ध ठहरा रहे, और जब तक जल से स्नान न कर ले तब तक पवित्र वस्तुओं में से कुछ न खाए।
- Verse 7: तब सूर्य अस्त होने पर वह शुद्ध ठहरेगा; और तब वह पवित्र वस्तुओं में से खा सकेगा, क्योंकि उसका भोजन वही है।
- Verse 8: जो जानवर अपने आप से मरा हो या पशु से फाड़ा गया हो उसे खाकर वह अपने आप को अशुद्ध न करे; मैं यहोवा हूँ।
- Verse 9: इसलिये याजक लोग मेरी सौंपी हुई वस्तुओं की रक्षा करें, ऐसा न हो कि वे उनको अपवित्र करके पाप का भार उठाएँ, और इसके कारण मर भी जाएँ; मैं उनका पवित्र करनेवाला यहोवा हूँ।
- Verse 10: “पराए कुल का जन किसी पवित्र वस्तु को न खाने पाए, चाहे वह याजक का अतिथि हो या मज़दूर हो, तौभी वह कोई पवित्र वस्तु न खाए।
- Verse 11: यदि याजक किसी प्राणी को रुपया देकर मोल ले, तो वह प्राणी उसमें से खा सकता है; और जो याजक के घर में उत्पन्न हुए हों वे भी उसके भोजन में से खाएँ।
- Verse 12: यदि याजक की बेटी पराए कुल के किसी पुरुष से ब्याही गई हो, तो वह भेंट की हुई पवित्र वस्तुओं में से न खाए।
- Verse 13: यदि याजक की बेटी विधवा या त्यागी हुई हो, और उसकी सन्तान न हो, और वह अपनी बाल्यावस्था की रीति के अनुसार अपने पिता के घर में रहती हो, तो वह अपने पिता के भोजन में से खाए; पर पराए कुल का कोई उसमें से न खाने पाए।
- Verse 14: और यदि कोई मनुष्य किसी पवित्र वस्तु में से कुछ भूल से खा जाए, तो वह उसका पाँचवाँ भाग बढ़ाकर उसे याजक को भर दे।
- Verse 15: वे इस्राएलियों की पवित्र की हुई वस्तुओं को, जिन्हें वे यहोवा के लिये चढ़ाएँ, अपवित्र न करें।
- Verse 16: वे उनको अपनी पवित्र वस्तुओं में से खिलाकर उनसे अपराध का दोष न उठवाएँ; मैं उनका पवित्र करनेवाला यहोवा हूँ।”
- Verse 17: फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 18: “हारून और उसके पुत्रों से और इस्राएलियों से समझाकर कह कि इस्राएल के घराने या इस्राएलियों में रहनेवाले परदेशियों में से कोई क्यों न हो जो मन्नत या स्वेच्छाबलि करने के लिये यहोवा को कोई होमबलि चढ़ाए,
- Verse 19: तो अपने निमित्त ग्रहणयोग्य ठहरने के लिये बैलों या भेड़ों या बकरियों में से निर्दोष नर चढ़ाया जाए।
- Verse 20: जिसमें कोई भी दोष हो उसे न चढ़ाना; क्योंकि वह तुम्हारे निमित्त ग्रहणयोग्य न ठहरेगा।
- Verse 21: और जो कोई बैलों या भेड़–बकरियों में से विशेष वस्तु संकल्प करने के लिये या स्वेच्छाबलि के लिये यहोवा को मेलबलि चढ़ाए, तो ग्रहण होने के लिये अवश्य है कि वह निर्दोष हो, उसमें कोई भी दोष न हो।
- Verse 22: जो अंधा या अंग का टूटा या लूला हो, अथवा उसमें रसौली या खौरा या खुजली हो, ऐसों को यहोवा के लिये न चढ़ाना, उनको वेदी पर यहोवा के लिये हव्य न चढ़ाना।
- Verse 23: जिस किसी बैल या भेड़ या बकरे का कोई अंग अधिक या कम बड़ा हो उसको स्वेच्छाबलि के लिये चढ़ा सकते हो, परन्तु मन्नत पूरी करने के लिये वह ग्रहण न होगा।
- Verse 24: जिसके अंड दबे या कुचले या टूटे या कट गए हों उसको यहोवा के लिये न चढ़ाना, और अपने देश में भी ऐसा काम न करना।
- Verse 25: इनमें से किसी को तुम अपने परमेश्वर का भोजन जानकर किसी परदेशी से लेकर न चढ़ाओ; क्योंकि उनमें उनका बिगाड़ वर्तमान है, उनमें दोष है, इसलिये वे तुम्हारे निमित्त ग्रहण न होंगे।”
- Verse 26: फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 27: “जब बछड़ा या भेड़ या बकरी का बच्चा उत्पन्न हो, तो वह सात दिन तक अपनी माँ के साथ रहे; फिर आठवें दिन से आगे को वह यहोवा के हव्य के लिये ग्रहणयोग्य ठहरेगा।
- Verse 28: चाहे गाय, चाहे भेड़ी या बकरी हो, उसको और उसके बच्चे को एक ही दिन में बलि न करना।
- Verse 29: और जब तुम यहोवा के लिये धन्यवाद का मेलबलि चढ़ाओ, तो उसे इसी प्रकार से करना जिससे वह ग्रहणयोग्य ठहरे।
- Verse 30: वह उसी दिन खाया जाए, उसमें से कुछ भी सबेरे तक रहने न पाए; मैं यहोवा हूँ।
- Verse 31: “इसलिये तुम मेरी आज्ञाओं को मानना और उनका पालन करना; मैं यहोवा हूँ।
- Verse 32: और मेरे पवित्र नाम को अपवित्र न ठहराना, क्योंकि मैं इस्राएलियों के बीच अवश्य ही पवित्र माना जाऊँगा; क्योंकि मैं तुम्हारा पवित्र करनेवाला यहोवा हूँ,
- Verse 33: जो तुम को मिस्र देश से निकाल लाया, जिससे तुम्हारा परमेश्वर बना रहूँ; मैं यहोवा हूँ।”