P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
व्यवस्थाविवरण
अध्याय 11
- Verse 1: “इसलिये तू अपने परमेश्वर यहोवा से अत्यन्त प्रेम रखना, और जो कुछ उसने तुझे सौंपा है उसका, अर्थात् उसकी विधियों, नियमों, और आज्ञाओं का नित्य पालन करना।
- Verse 2: और तुम आज यह सोच समझ लो (क्योंकि मैं तो तुम्हारे बाल–बच्चों से नहीं कहता,) जिन्होंने न तो कुछ देखा और न जाना है कि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने क्या क्या ताड़ना की, और कैसी महिमा, और बलवन्त हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा दिखाई,
- Verse 3: और मिस्र में वहाँ के राजा फ़िरौन को कैसे कैसे चिह्न दिखाए, और उसके सारे देश में कैसे कैसे चमत्कार के काम किए;
- Verse 4: और उसने मिस्र की सेना के घोड़ों और रथों से क्या किया, अर्थात् जब वे तुम्हारा पीछा कर रहे थे तब उसने उनको लाल समुद्र में डुबोकर किस प्रकार नष्ट कर डाला, कि आज तक उनका पता नहीं;
- Verse 5: और तुम्हारे इस स्थान में पहुँचने तक उसने जंगल में तुम से क्या क्या किया;
- Verse 6: और उसने रूबेनी एलीआब के पुत्र दातान और अबीराम से क्या क्या किया; अर्थात् पृथ्वी ने अपना मुँह पसारके उनको घरानों, और डेरों, और सब अनुचरों समेत सब इस्राएलियों के देखते देखते कैसे निगल लिया;
- Verse 7: परन्तु यहोवा के इन सब बड़े बड़े कामों को तुम ने अपनी आँखों से देखा है।
- Verse 8: “इस कारण जितनी आज्ञाएँ मैं आज तुम्हें सुनाता हूँ उन सभों को माना करना, इसलिये कि तुम सामर्थी होकर उस देश में जिसके अधिकारी होने के लिये तुम पार जा रहे हो प्रवेश करके उसके अधिकारी हो जाओ,
- Verse 9: और उस देश में बहुत दिन रहने पाओ, जिसे तुम्हें और तुम्हारे वंश को देने की शपथ यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी, और उसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं।
- Verse 10: देखो, जिस देश के अधिकारी होने को तुम जा रहे हो वह मिस्र देश के समान नहीं है, जहाँ से निकलकर आए हो, जहाँ तुम बीज बोते थे और हरे साग के खेत की रीति के अनुसार अपने पाँव से नालियाँ बनाकर सींचते थे;
- Verse 11: परन्तु जिस देश के अधिकारी होने को तुम पार जाने पर हो वह पहाड़ों और तराइयों का देश है, और आकाश की वर्षा के जल से सिंचता है;
- Verse 12: वह ऐसा देश है जिसकी तेरे परमेश्वर यहोवा को सुधि रहती है; और वर्ष के आदि से लेकर अन्त तक तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि उस पर निरन्तर लगी रहती है।
- Verse 13: “और यदि तुम मेरी आज्ञाओं को जो आज मैं तुम्हें सुनाता हूँ ध्यान से सुनकर, अपने सम्पूर्ण मन और सारे प्राण के साथ, अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखो और उसकी सेवा करते रहो,
- Verse 14: तो मैं तुम्हारे देश में बरसात के आदि और अन्त दोनों समयों की वर्षा को अपने अपने समय पर बरसाऊँगा, जिससे तू अपना अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल संचय कर सकेगा।
- Verse 15: और मैं तेरे पशुओं के लिये तेरे मैदान में घास उपजाऊँगा, और तू पेट भर खाएगा और सन्तुष्ट रहेगा।
- Verse 16: इसलिये अपने विषय में सावधान रहो, ऐसा न हो कि तुम्हारे मन धोखा खाएँ, और तुम बहककर दूसरे देवताओं की पूजा करने लगो और उनको दण्डवत् करने लगो,
- Verse 17: और यहोवा का कोप तुम पर भड़के और वह आकाश की वर्षा बन्द कर दे, और भूमि अपनी उपज न दे और तुम उस उत्तम देश में से जो यहोवा तुम्हें देता है शीघ्र नष्ट हो जाओ।
- Verse 18: इसलिये तुम मेरे ये वचन अपने अपने मन और प्राण में धारण किए रखना और चिह्न के रूप में अपने हाथों पर बाँधना और वे तुम्हारी आँखों के मध्य में टीके का काम दें।
- Verse 19: और तुम घर में बैठे मार्ग पर चलते, लेटते–उठते इनकी चर्चा करके अपने बच्चों को सिखाया करना।
- Verse 20: और इन्हें अपने अपने घर के चौखट के बाजुओं और अपने फाटकों के ऊपर लिखना;
- Verse 21: इसलिये कि जिस देश के विषय यहोवा ने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर कहा था, कि मैं उसे तुम्हें दूँगा, उस में तुम और तुम्हारे बच्चे दीर्घायु हों, और जब तक पृथ्वी के ऊपर का आकाश बना रहे तब तक वे भी बने रहें।
- Verse 22: इसलिये यदि तुम इन सब आज्ञाओं के मानने में जो मैं तुम्हें सुनाता हूँ पूरी चौकसी करके अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखो, और उसके सब मार्गों पर चलो, और उससे लिपटे रहो,
- Verse 23: तो यहोवा उन सब जातियों को तुम्हारे आगे से निकाल डालेगा, और तुम अपने से बड़ी और सामर्थी जातियों के अधिकारी हो जाओगे।
- Verse 24: जिस जिस स्थान पर तुम्हारे पाँव के तलवे पड़ें वे सब तुम्हारे ही हो जाएँगे, अर्थात् जंगल से लबानोन तक, और परात नामक महानद से लेकर पश्चिम के समुद्र तक तुम्हारी सीमा होगी।
- Verse 25: तुम्हारे सामने कोई भी खड़ा न रह सकेगा, क्योंकि जितनी भूमि पर तुम्हारे पाँव पड़ेंगे उस सब पर रहनेवालों के मन में तुम्हारा परमेश्वर यहोवा अपने वचन के अनुसार तुम्हारे कारण उनमें डर और थरथराहट उत्पन्न कर देगा।
- Verse 26: “सुनो, मैं आज के दिन तुम्हारे आगे आशीष और शाप दोनों रख देता हूँ।
- Verse 27: अर्थात् यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की इन आज्ञाओं को जो मैं आज तुम्हें सुनाता हूँ मानो, तो तुम पर आशीष होगी,
- Verse 28: और यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं को नहीं मानोगे, और जिस मार्ग की आज्ञा मैं आज सुनाता हूँ उसे तजकर दूसरे देवताओं के पीछे हो लोगे जिन्हें तुम नहीं जानते हो, तो तुम पर शाप पड़ेगा।
- Verse 29: और जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को उस देश में पहुँचाए जिसके अधिकारी होने को तू जाने पर है, तब आशीष गरिज्जीम पर्वत पर से और शाप एबाल पर्वत पर से सुनाना।
- Verse 30: क्या वे यरदन के पार, सूर्य के अस्त होने की ओर, अराबा के निवासी कनानियों के देश में, गिलगाल के सामने, मोरे के बांज वृक्षों के पास नहीं हैं?
- Verse 31: तुम तो यरदन पार इसी लिये जाने पर हो, कि जो देश तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उसके अधिकारी हो जाओ; और तुम उसके अधिकारी होकर उस में निवास करोगे;
- Verse 32: इसलिये जितनी विधियाँ और नियम मैं आज तुम को सुनाता हूँ उन सभों के मानने में चौकसी करना।