வேதாகமம்
पुराना नियम
नहेम्याह
अध्याय 7
- Verse 1: जब शहरपनाह बन गई, और मैं ने उसके फाटक खड़े किए, और द्वारपाल, और गवैये, और लेवीय लोग ठहराये गए,
- Verse 2: तब मैं ने अपने भाई हनानी और राजगढ़ के हाकिम हनन्याह को यरूशलेम का अधिकारी ठहराया, क्योंकि यह सच्चा पुरुष और बहुतेरों से अधिक परमेश्वर का भय माननेवाला था।
- Verse 3: मैं ने उनसे कहा, “जब तक धूप कड़ी न हो, तब तक यरूशलेम के फाटक न खोले जाएँ और जब पहरुए पहरा देते रहें, तब ही फाटक बन्द किए जाएँ और बेड़े लगाए जाएँ। फिर यरूशलेम के निवासियों में से तू रखवाले ठहरा जो अपना अपना पहरा अपने अपने घर के सामने दिया करें।”
- Verse 4: नगर तो लम्बा चौड़ा था, परन्तु उसमें लोग थोड़े थे, और घर नहीं बने थे।
- Verse 5: तब मेरे परमेश्वर ने मेरे मन में यह उपजाया कि रईसों, हाकिमों और प्रजा के लोगों को इसलिये इकट्ठा करूँ, कि वे अपनी अपनी वंशावली के अनुसार गिने जाएँ। मुझे पहले–पहल यरूशलेम को आए हुओं का वंशावलीपत्र मिला, और उसमें मैं ने यों लिखा हुआ पाया :
- Verse 6: जिनको बेबीलोन का राजा, नबूकदनेस्सर बन्दी बना करके ले गया था, उनमें से प्रान्त के जो लोग बँधुआई से छूटकर, यरूशलेम और यहूदा के अपने अपने नगर को आए;
- Verse 7: वे जरुब्बाबेल, येशू, नहेम्याह, अजर्याह, राम्याह, नहमानी, मोर्दकै, बिलशान, मिस्पेरेत, बिग्वै, नहूम और बाना के संग आए। इस्राएली प्रजा के लोगों की गिनती यह है :
- Verse 8: परोश की सन्तान दो हज़ार एक सौ बहत्तर,
- Verse 9: सपत्याह की सन्तान तीन सौ बहत्तर,
- Verse 10: आरह की सन्तान छ: सौ बावन,
- Verse 11: पहत्मोआब की सन्तान याने येशू और योआब की सन्तान, दो हज़ार आठ सौ अठारह,
- Verse 12: एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन,
- Verse 13: जत्तू की सन्तान आठ सौ पैंतालीस,
- Verse 14: जक्कै की सन्तान सात सौ साठ,
- Verse 15: बिन्नूई की सन्तान छ: सौ अड़तालीस,
- Verse 16: बेबै की सन्तान छ: सौ अट्ठाईस,
- Verse 17: अजगाद की सन्तान दो हज़ार तीन सौ बाईस,
- Verse 18: आदोनीकाम की सन्तान छ: सौ सड़सठ,
- Verse 19: बिग्वै की सन्तान दो हज़ार सड़सठ,
- Verse 20: आदीन की सन्तान छ: सौ पचपन,
- Verse 21: हिजकिय्याह की सन्तान आतेर के वंश में से अट्ठानवे,
- Verse 22: हाशम की सन्तान तीन सौ अट्ठाईस,
- Verse 23: बैसै की सन्तान तीन सौ चौबीस,
- Verse 24: हारीप की सन्तान एक सौ बारह,
- Verse 25: गिबोन के लोग पंचानबे,
- Verse 26: बैतलहम और नतोपा के मनुष्य एक सौ अट्ठासी,
- Verse 27: अनातोत के मनुष्य एक सौ अट्ठाईस,
- Verse 28: बेतजमावत के मनुष्य बयालीस,
- Verse 29: किर्यत्यारीम, कपीर, और बेरोत के मनुष्य सात सौ तैंतालीस,
- Verse 30: रामा और गेबा के मनुष्य छ: सौ इक्कीस,
- Verse 31: मिकपास के मनुष्य एक सौ बाईस,
- Verse 32: बेतेल और ऐ के मनुष्य एक सौ तेईस,
- Verse 33: दूसरे नबो के मनुष्य बावन,
- Verse 34: दूसरे एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन,
- Verse 35: हारीम की सन्तान तीन सौ बीस,
- Verse 36: यरीहो के लोग तीन सौ पैंतालीस,
- Verse 37: लोद हादीद और ओनों के लोग सात सौ इक्कीस,
- Verse 38: सना के लोग तीन हज़ार नौ सौ तीस।
- Verse 39: फिर याजक अर्थात् येशू के घराने में से यदायाह की सन्तान नौ सौ तिहत्तर,
- Verse 40: इम्मेर की सन्तान एक हज़ार बावन,
- Verse 41: पशहूर की सन्तान बारह सौ सैंतालीस,
- Verse 42: हारीम की सन्तान एक हज़ार सत्रह।
- Verse 43: फिर लेवीय ये थे : होदवा के वंश में से कदमीएल की सन्तान येशू की सन्तान चौहत्तर।
- Verse 44: फिर गवैये ये थे : आसाप की सन्तान एक सौ अड़तालीस।
- Verse 45: फिर द्वारपाल ये थे : शल्लूम की सन्तान, आतेर की सन्तान, तल्मोन की सन्तान, अक्कूब की सन्तान, हतीता की सन्तान, और शोबै की सन्तान, जो सब मिलाकर एक सौ अड़तीस हुए।
- Verse 46: फिर नतीन अर्थात् सीहा की सन्तान, हसूपा की सन्तान, तब्बाओत की सन्तान,
- Verse 47: केरोस की सन्तान, सीआ की सन्तान, पादोन की सन्तान,
- Verse 48: लबाना की सन्तान, हगाबा की सन्तान, शल्मै की सन्तान,
- Verse 49: हानान की सन्तान, गिद्देल की सन्तान, गहर की सन्तान,
- Verse 50: राया की सन्तान, रसीन की सन्तान, नकोदा की सन्तान,
- Verse 51: गज्जाम की सन्तान, उज्जा की सन्तान, पासेह की सन्तान,
- Verse 52: बेसै की सन्तान, मूनीम की सन्तान, नपूशस की सन्तान,
- Verse 53: बकबूक की सन्तान, हकूपा की सन्तान, हर्हूर की सन्तान,
- Verse 54: बसलीत की सन्तान, महीदा की सन्तान, हर्शा की सन्तान,
- Verse 55: बर्कोस की सन्तान, सीसरा की सन्तान, तेमेह की सन्तान,
- Verse 56: नसीह की सन्तान, और हतीपा की सन्तान।
- Verse 57: फिर सुलैमान के दासों की सन्तान : सोतै की सन्तान, सोपेरेत की सन्तान, परीदा की सन्तान,
- Verse 58: याला की सन्तान, दर्कोन की सन्तान, गिद्देल की सन्तान,
- Verse 59: शपत्याह की सन्तान, हत्तील की सन्तान, पोकेरेत सवायीम की सन्तान, और आमोन की सन्तान।
- Verse 60: नतीन और सुलैमान के दासों की सन्तान मिलाकर तीन सौ बानवे थे।
- Verse 61: ये वे हैं, जो तेलमेलह, तेलहर्शा, करूब, अद्दोन, और इम्मेर से यरूशलेम को गए, परन्तु अपने अपने पितरों के घराने और वंशावली न बता सके, कि इस्राएल के हैं या नहीं :
- Verse 62: दलायाह की सन्तान, तोबिय्याह की सन्तान, और दकोदा की सन्तान, जो सब मिलाकर छ: सौ बयालीस थे।
- Verse 63: याजकों में से होबायाह की सन्तान, हक्कोस की सन्तान, और बर्जिल्लै की सन्तान, जिसने गिलादी बर्जिल्लै की बेटियों में से एक से विवाह कर लिया, और उन्हीं का नाम रख लिया था।
- Verse 64: इन्होंने अपना अपना वंशावलीपत्र अन्य वंशावलीपत्रों में ढूँढ़ा, परन्तु न पाया, इसलिये वे अशुद्ध ठहरकर याजकपद से निकाले गए;
- Verse 65: और अधिपति ने उनसे कहा कि जब तक ऊरीम और तुम्मीम धारण करनेवाला कोई याजक न उठे, तब तक तुम कोई परमपवित्र वस्तु खाने न पाओगे।
- Verse 66: पूरी मण्डली के लोग मिलाकर बयालीस हज़ार तीन सौ साठ ठहरे।
- Verse 67: इनको छोड़ उनके सात हज़ार तीन सौ सैंतीस दास–दासियाँ, और दो सौ पैंतालीस गानेवाले और गानेवालियाँ थीं।
- Verse 68: उनके घोड़े सात सौ छत्तीस, खच्चर दो सौ पैंतालीस,
- Verse 69: ऊँट चार सौ पैंतीस और गदहे छ: हज़ार सात सौ बीस थे।
- Verse 70: पितरों के घरानों के कई एक मुख्य पुरुषों ने काम के लिये दान दिया। अधिपति ने तो चन्दे में हज़ार दर्कमोन सोना, पचास कटोरे और पाँच सौ तीस याजकों के अँगरखे दिए।
- Verse 71: और पितरों के घरानों के कई मुख्य मुख्य पुरुषों ने उस काम के चन्दे में बीस हज़ार दर्कमोन सोना और दो हज़ार दो सौ माने चाँदी दी।
- Verse 72: शेष प्रजा ने जो दिया, वह बीस हज़ार दर्कमोन सोना, दो हज़ार माने चाँदी और सड़सठ याजकों के अँगरखे हुए।
- Verse 73: इस प्रकार याजक, लेवीय, द्वारपाल, गवैये, प्रजा के कुछ लोग और नतीन और सब इस्राएली अपने अपने नगर में बस गए।