ಕನ್ನಡ ಸತ್ಯವೇದವು
पुराना नियम
उत्पत्ति
अध्याय 45
- Verse 1: तब यूसुफ उन सब के सामने जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका; और पुकार के कहा, “मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो।” भाइयों के सामने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
- Verse 2: तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा; और मिस्रियों ने सुना, और फ़िरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
- Verse 3: तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, “मैं यूसुफ हूँ, क्या मेरा पिता अब तक जीवित है?” इसका उत्तर उसके भाई न दे सके; क्योंकि वे उसके सामने घबरा गए थे।
- Verse 4: फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा,* “मेरे निकट आओ।” यह सुनकर वे निकट गए। फिर उसने कहा, “मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूँ, जिसको तुम ने मिस्र आने वालों के हाथ बेच डाला था।
- Verse 5: अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहाँ बेच डाला, इससे उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे तुम्हारे आगे भेज दिया है।
- Verse 6: क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है; और अब पाँच वर्ष और ऐसे ही होंगे कि उनमें न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
- Verse 7: इसलिये परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
- Verse 8: इस रीति अब मुझ को यहाँ पर भेजनेवाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा; और उसी ने मुझे फ़िरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।
- Verse 9: अत: शीघ्र मेरे पिता के पास जाकर कहो, ‘तेरा पुत्र यूसुफ यह कहता है कि परमेश्वर ने मुझे सारे मिस्र का स्वामी ठहराया है; इसलिये तू मेरे पास बिना विलम्ब किए चला आ।
- Verse 10: तेरा निवास गोशेन देश में होगा, और तू बेटे, पोतों, भेड़–बकरियों, गाय–बैलों, और अपने सब कुछ समेत मेरे निकट रहेगा।
- Verse 11: और अकाल के जो पाँच वर्ष और होंगे, उनमें मैं वहीं तेरा पालन–पोषण करूँगा; ऐसा न हो कि तू और तेरा घराना, वरन् जितने तेरे हैं, वे भूखों मरें।’
- Verse 12: और तुम अपनी आँखों से देखते हो, और मेरा भाई बिन्यामीन भी अपनी आँखों से देखता है कि जो हम से बातें कर रहा है वह यूसुफ है।
- Verse 13: तुम मेरे सब वैभव का, जो मिस्र में है और जो कुछ तुम ने देखा है, उस सब का मेरे पिता से वर्णन करना; और तुरन्त मेरे पिता को यहाँ ले आना।”
- Verse 14: तब वह अपने भाई बिन्यामीन के गले से लिपटकर रोया; और बिन्यामीन भी उसके गले से लिपटकर रोया।
- Verse 15: वह अपने सब भाइयों को भी चूमकर रोया, और इसके पश्चात् उसके भाई उससे बातें करने लगे।
- Verse 16: इस बात का समाचार, कि यूसुफ के भाई आए हैं, फ़िरौन के भवन तक पहुँच गया, और इससे फ़िरौन और उसके कर्मचारी प्रसन्न हुए।
- Verse 17: इसलिये फ़िरौन ने यूसुफ से कहा, “अपने भाइयों से कह कि एक काम करो : अपने पशुओं को लादकर कनान देश में चले जाओ।
- Verse 18: और अपने पिता और अपने अपने घर के लोगों को लेकर मेरे पास आओ; और मिस्र देश में जो कुछ अच्छे से अच्छा है वह मैं तुम्हें दूँगा, और तुम्हें देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाने को मिलेंगे।
- Verse 19: और तुझे आज्ञा मिली है, ‘तुम एक काम करो कि मिस्र देश से अपने बाल–बच्चों और स्त्रियों के लिये गाड़ियाँ ले जाओ, और अपने पिता को ले आओ।
- Verse 20: और अपनी सामग्री का मोह न करना क्योंकि सारे मिस्र देश में जो कुछ अच्छे से अच्छा है वह तुम्हारा है’।”
- Verse 21: इस्राएल के पुत्रों ने वैसा ही किया; और यूसुफ ने फ़िरौन की आज्ञा के अनुसार उन्हें गाड़ियाँ दीं, और मार्ग के लिये भोजन–सामग्री भी दी।
- Verse 22: उनमें से एक एक जन को उसने एक एक जोड़ा वस्त्र भी दिया; और बिन्यामीन को तीन सौ रूपे के टुकड़े और पाँच जोड़े वस्त्र दिए।
- Verse 23: अपने पिता के पास उसने जो भेजा वह यह है, अर्थात् मिस्र की अच्छी वस्तुओं से लदे हुए दस गदहे, और अन्न और रोटी और उसके पिता के मार्ग के लिये भोजनवस्तु से लदी हुई दस गदहियाँ।
- Verse 24: तब उसने अपने भाइयों को विदा किया, और वे चल दिए; और उसने उनसे कहा, “मार्ग में कहीं झगड़ा न करना।”
- Verse 25: मिस्र से चलकर वे कनान देश में अपने पिता याक़ूब के पास पहुँचे।
- Verse 26: और उससे यह कहा, “यूसुफ अब तक जीवित है, और सारे मिस्र देश पर प्रभुता वही करता है।” पर उस ने उनकी प्रतीति न की और वह अपने आपे में न रहा।
- Verse 27: तब उन्होंने अपने पिता याक़ूब से यूसुफ की सारी बातें, जो उसने उनसे कही थीं कह दीं। जब उसने उन गाड़ियों को देखा, जो यूसुफ ने उसके ले आने के लिये भेजीं थीं, तब उसका चित्त स्थिर हो गया।
- Verse 28: और इस्राएल ने कहा, “बस, मेरा पुत्र यूसुफ अब तक जीवित है; मैं अपनी मृत्यु से पहले जाकर उसको देखूँगा।”