पवित्र बाइबिल
नया नियम
यूहन्ना
अध्याय 18
- Verse 1: यीशु ये बातें कहकर अपने चेलों के साथ किद्रोन नाले के पार गया। वहाँ एक बारी थी, जिसमें वह और उसके चेले गए।
- Verse 2: उसका पकड़वानेवाला यहूदा भी वह जगह जानता था, क्योंकि यीशु अपने चेलों के साथ वहाँ जाया करता था।
- Verse 3: तब यहूदा, सैनिकों के एक दल को और प्रधान याजकों और फरीसियों की ओर से प्यादों को लेकर, दीपकों और मशालों और हथियारों को लिये हुए वहाँ आया।
- Verse 4: तब यीशु, उन सब बातों को जो उस पर आनेवाली थीं जानकर, निकला और उनसे कहा, “किसे ढूँढ़ते हो?”
- Verse 5: उन्होंने उसको उत्तर दिया, “यीशु नासरी को।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं हूँ।” उसका पकड़वानेवाला यहूदा भी उनके साथ खड़ा था।
- Verse 6: उसके यह कहते ही, “मैं हूँ,” वे पीछे हटकर भूमि पर गिर पड़े।
- Verse 7: तब उसने फिर उनसे पूछा, “तुम किसको ढूँढ़ते हो।” वे बोले, “यीशु नासरी को।”
- Verse 8: यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तो तुम से कह चुका हूँ कि मैं हूँ, यदि मुझे ढूँढ़ते हो तो इन्हें जाने दो।”
- Verse 9: यह इसलिये हुआ कि वह वचन पूरा हो जो उसने कहा था : “जिन्हें तू ने मुझे दिया उनमें से मैं ने एक को भी न खोया।”
- Verse 10: तब शमौन पतरस ने तलवार, जो उसके पास थी, खींची और महायाजक के दास पर चलाकर उसका दाहिना कान उड़ा दिया। उस दास का नाम मलखुस था।
- Verse 11: तब यीशु ने पतरस से कहा, “अपनी तलवार म्यान में रख। जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है, क्या मैं उसे न पीऊँ?”
- Verse 12: तब सैनिकों और उनके सूबेदार और यहूदियों के प्यादों ने यीशु को पकड़कर बाँध लिया,
- Verse 13: और पहले उसे हन्ना के पास ले गए, क्योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था।
- Verse 14: यह वही काइफा था, जिसने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिये एक पुरुष का मरना अच्छा है।
- Verse 15: शमौन पतरस और एक अन्य चेला भी यीशु के पीछे हो लिए। यह चेला महायाजक का जाना–पहचाना था, इसलिये वह यीशु के साथ महायाजक के आँगन में गया,
- Verse 16: परन्तु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा। तब वह दूसरा चेला जो महायाजक का जाना–पहचाना था, बाहर निकला और द्वारपालिन से कहकर पतरस को भीतर ले आया।
- Verse 17: उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, “कहीं तू भी इस मनुष्य के चेलों में से तो नहीं है?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।”
- Verse 18: दास और प्यादे जाड़े के कारण कोयले धधकाकर खड़े आग ताप रहे थे, और पतरस भी उनके साथ खड़ा आग ताप रहा था।
- Verse 19: तब महायाजक ने यीशु से उसके चेलों के विषय में और उसके उपदेश के विषय में पूछताछ की।
- Verse 20: यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं ने संसार से खुलकर बातें कीं; मैं ने आराधनालयों और मन्दिर में, जहाँ सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं, सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा।
- Verse 21: तू मुझ से क्यों पूछता है? सुननेवालों से पूछ कि मैं ने उनसे क्या कहा। देख, वे जानते हैं कि मैं ने क्या क्या कहा।”
- Verse 22: जब उसने यह कहा, तो प्यादों में से एक ने जो पास खड़ा था, यीशु को थप्पड़ मारकर कहा, “क्या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है?”
- Verse 23: यीशु ने उसे उत्तर दिया, “यदि मैं ने बुरा कहा, तो उस बुराई की गवाही दे; परन्तु यदि भला कहा, तो मुझे क्यों मारता है?”
- Verse 24: हन्ना ने उसे बन्धे हुए काइफा महायाजक के पास भेज दिया।
- Verse 25: शमौन पतरस खड़ा हुआ आग ताप रहा था। तब उन्होंने उससे कहा, “कहीं तू भी उसके चेलों में से तो नहीं है?” उसने इन्कार करके कहा, “मैं नहीं हूँ।”
- Verse 26: महायाजक के दासों में से एक, जो उसके कुटुम्ब में से था जिसका कान पतरस ने काट डाला था, बोला, “क्या मैं ने तुझे उसके साथ बारी में नहीं देखा था?”
- Verse 27: पतरस फिर इन्कार कर गया, और तुरन्त मुर्ग़ ने बाँग दी।
- Verse 28: तब वे यीशु को काइफा के पास से किले को ले गए, और भोर का समय था, परन्तु वे आप किले के भीतर नहीं गए ताकि अशुद्ध न हों परन्तु फसह खा सकें।
- Verse 29: तब पिलातुस उनके पास बाहर निकल आया और कहा, “तुम इस मनुष्य पर किस बात का आरोप लगाते हो?”
- Verse 30: उन्होंने उसको उत्तर दिया, “यदि वह कुकर्मी न होता तो हम उसे तेरे हाथ न सौंपते।”
- Verse 31: पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही इसे ले जाकर अपनी व्यवस्था के अनुसार उसका न्याय करो।” यहूदियों ने उससे कहा, “हमें अधिकार नहीं कि किसी का प्राण लें।”
- Verse 32: यह इसलिये हुआ कि यीशु की वह बात पूरी हो जो उसने यह संकेत देते हुए कही थी कि उसकी मृत्यु कैसी होगी।
- Verse 33: तब पिलातुस फिर किले के भीतर गया, और यीशु को बुलाकर उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?”
- Verse 34: यीशु ने उत्तर दिया, “क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या दूसरों ने मेरे विषय में तुझ से यह कहा है?”
- Verse 35: पिलातुस ने उत्तर दिया, “क्या मैं यहूदी हूँ? तेरी ही जाति और प्रधान याजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा है। तू ने क्या किया है?”
- Verse 36: यीशु ने उत्तर दिया, “मेरा राज्य इस संसार का नहीं; यदि मेरा राज्य इस संसार का होता, तो मेरे सेवक लड़ते कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता : परन्तु मेरा राज्य यहाँ का नहीं।”
- Verse 37: पिलातुस ने उससे कहा, “तो क्या तू राजा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “तू कहता है कि मैं राजा हूँ। मैं ने इसलिये जन्म लिया और इसलिये संसार में आया हूँ कि सत्य की गवाही दूँ। जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्द सुनता है।”
- Verse 38: पिलातुस ने उससे कहा, “सत्य क्या है?” यह कह कर वह फिर यहूदियों के पास निकल गया और उनसे कहा, “मैं तो उसमें कुछ दोष नहीं पाता।
- Verse 39: पर तुम्हारी यह रीति है कि मैं फसह में तुम्हारे लिये एक व्यक्ति को छोड़ दूँ। अत: क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?”
- Verse 40: तब उन्होंने फिर चिल्लाकर कहा, “इसे नहीं, परन्तु हमारे लिये बरअब्बा को छोड़ दे।” और बरअब्बा डाकू था।