पवित्र बाइबिल
नया नियम
यूहन्ना
अध्याय 3
- Verse 1: फरीसियों में नीकुदेमुस नाम का एक मनुष्य था, जो यहूदियों का सरदार था।
- Verse 2: उसने रात को यीशु के पास आकर उससे कहा, “हे रब्बी, हम जानते हैं कि तू परमेश्वर की ओर से गुरु होकर आया है, क्योंकि कोई इन चिह्नों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो तो नहीं दिखा सकता।”
- Verse 3: यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।”
- Verse 4: नीकुदेमुस ने उस से कहा, “मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?”
- Verse 5: यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।
- Verse 6: क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।
- Verse 7: अचम्भा न कर कि मैं ने तुझ से कहा, ‘तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।’
- Verse 8: हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।”
- Verse 9: नीकुदेमुस ने उसको उत्तर दिया, “ये बातें कैसे हो सकती हैं?”
- Verse 10: यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “तू इस्राएलियों का गुरु होकर भी क्या इन बातों को नहीं समझता?
- Verse 11: मैं तुझ से सच सच कहता हूँ कि हम जो जानते हैं वह कहते हैं, और जिसे हम ने देखा है उसकी गवाही देते हैं, और तुम हमारी गवाही ग्रहण नहीं करते।
- Verse 12: जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं और तुम विश्वास नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्वर्ग की बातें कहूँ तो फिर कैसे विश्वास करोगे?
- Verse 13: कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है।
- Verse 14: और जिस रीति से मूसा ने जंगल में साँप को ऊँचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊँचे पर चढ़ाया जाए;
- Verse 15: ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह अनन्त जीवन पाए।
- Verse 16: “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
- Verse 17: परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा कि जगत पर दण्ड की आज्ञा दे, परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
- Verse 18: जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दण्ड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
- Verse 19: और दण्ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे।
- Verse 20: क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
- Verse 21: परन्तु जो सत्य पर चलता है, वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।”
- Verse 22: इसके बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहाँ उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।
- Verse 23: यूहन्ना भी शालेम के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था, क्योंकि वहाँ बहुत जल था, और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे–
- Verse 24: यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था–
- Verse 25: वहाँ यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद–विवाद हुआ।
- Verse 26: और उन्होंने यूहन्ना के पास आकर उससे कहा, “हे रब्बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिसकी तू ने गवाही दी है; देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।”
- Verse 27: यूहन्ना ने उत्तर दिया, “जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाय, तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।
- Verse 28: तुम तो आप ही मेरे गवाह हो कि मैं ने कहा, ‘मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूँ।’
- Verse 29: जिसकी दुलहिन है, वही दूल्हा है; परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उसकी सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है : अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है।
- Verse 30: अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ।
- Verse 31: “जो ऊपर से आता है वह सर्वोत्तम है; जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है, और पृथ्वी की ही बातें कहता है : जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।
- Verse 32: जो कुछ उसने देखा और सुना है, उसी की गवाही देता है; और कोई उसकी गवाही ग्रहण नहीं करता।
- Verse 33: जिसने उसकी गवाही ग्रहण कर ली उसने इस बात पर छाप लगा दी कि परमेश्वर सच्चा है।
- Verse 34: क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है; क्योंकि वह आत्मा नाप नापकर नहीं देता।
- Verse 35: पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब वस्तुएँ उसके हाथ में दे दी हैं।
- Verse 36: जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है।”