P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
गिनती
अध्याय 9
- Verse 1: इस्राएलियों के मिस्र देश से निकलने के दूसरे वर्ष के पहले महीने में यहोवा ने सीनै के जंगल में मूसा से कहा,
- Verse 2: “इस्राएली फसह नामक पर्व को उसके नियत समय पर मनाया करें।
- Verse 3: अर्थात् इसी महीने के चौदहवें दिन को गोधूलि के समय तुम लोग उसे सब विधियों और नियमों के अनुसार मानना।”
- Verse 4: तब मूसा ने इस्राएलियों से फसह मनाने के लिये कह दिया।
- Verse 5: और उन्होंने पहले महीने के चौदहवें दिन को गोधूलि के समय सीनै के जंगल में फसह को मनाया; और जो जो आज्ञाएँ यहोवा ने मूसा को दी थीं उन्हीं के अनुसार इस्राएलियों ने किया।
- Verse 6: परन्तु कुछ लोग एक मनुष्य के शव के द्वारा अशुद्ध होने के कारण उस दिन फसह को न मना सके; वे उसी दिन मूसा और हारून के समीप जाकर मूसा से कहने लगे,
- Verse 7: “हम लोग एक मनुष्य के शव के कारण अशुद्ध हैं; परन्तु हम क्यों रुके रहें, और इस्राएलियों के संग यहोवा का चढ़ावा नियत समय पर क्यों न चढ़ाएँ?”
- Verse 8: मूसा ने उन से कहा, “ठहरे रहो, मैं सुन लूँ कि यहोवा तुम्हारे विषय में क्या आज्ञा देता है।”
- Verse 9: यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 10: “इस्राएलियों से कह कि चाहे तुम लोग चाहे तुम्हारे वंश में से कोई भी किसी लोथ के कारण अशुद्ध हो, या दूर की यात्रा पर हो, तौभी वह यहोवा के लिये फसह को माने।
- Verse 11: वे उसे दूसरे महीने के चौदहवें दिन को गोधूलि के समय मनाएँ; और फसह के बलिपशु के मांस को अखमीरी रोटी और कड़वे सागपात के साथ खाएँ।
- Verse 12: और उसमें से कुछ भी सबेरे तक न रख छोड़ें, और न उसकी कोई हड्डी तोड़ें; वे उस पर्व को फसह की सारी विधियों के अनुसार मनाएँ।
- Verse 13: परन्तु जो मनुष्य शुद्ध हो और यात्रा पर न हो, परन्तु फसह के पर्व को न माने वह प्राणी अपने लोगों में से नष्ट किया जाए, उस मनुष्य को यहोवा का चढ़ावा नियत समय पर न ले आने के कारण अपने पाप का बोझ उठाना पड़ेगा।
- Verse 14: यदि कोई परदेशी तुम्हारे साथ रहकर चाहे कि यहोवा के लिये फसह मनाए तो वह उसी विधि और नियम के अनुसार उसको माने; देशी और परदेशी दोनों के लिये तुम्हारी एक ही विधि हो।”
- Verse 15: जिस दिन निवास जो साक्षी का तम्बू भी कहलाता है खड़ा किया गया, उस दिन बादल उस पर छा गया; और सन्ध्या को वह निवास पर आग–सा दिखाई दिया और भोर तक दिखाई देता रहा।
- Verse 16: नित्य ऐसा ही हुआ करता था; अर्थात् दिन को बादल छाया रहता, और रात को आग दिखाई देती थी।
- Verse 17: और जब जब वह बादल तम्बू पर से उठ जाता तब इस्राएली प्रस्थान करते थे; और जिस स्थान पर बादल ठहर जाता वहीं इस्राएली अपने डेरे खड़े करते थे।
- Verse 18: यहोवा की आज्ञा से इस्राएली प्रस्थान करते थे, और यहोवा ही की आज्ञा से वे डेरे खड़े भी करते थे; और जितने दिन तक वह बादल निवास पर ठहरा रहता उतने दिन तक वे डेरे डाले पड़े रहते थे।
- Verse 19: जब बादल बहुत दिन निवास पर छाया रहता तब भी इस्राएली यहोवा की आज्ञा मानते, और प्रस्थान नहीं करते थे।
- Verse 20: कभी–कभी वह बादल थोड़े ही दिन तक निवास पर रहता, और तब भी वे यहोवा की आज्ञा से डेरे डाले पड़े रहते थे; और फिर यहोवा की आज्ञा ही से वह प्रस्थान करते थे।
- Verse 21: और कभी कभी बादल केवल सन्ध्या से भोर तक रहता; और जब वह भोर को उठ जाता था तब वे प्रस्थान करते थे, और यदि वह रात दिन बराबर रहता तो जब बादल उठ जाता तब ही वे प्रस्थान करते थे।
- Verse 22: वह बादल चाहे दो दिन, चाहे एक महीना, चाहे वर्ष भर, जब तक निवास पर ठहरा रहता तब तक इस्राएली अपने डेरों में रहते और प्रस्थान नहीं करते थे; परन्तु जब वह उठ जाता तब वे प्रस्थान करते थे।
- Verse 23: यहोवा की आज्ञा से वे अपने डेरे खड़े करते, और यहोवा ही की आज्ञा से वे प्रस्थान करते थे; जो आज्ञा यहोवा मूसा के द्वारा देता था उसको वे माना करते थे।