पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
2 इतिहास
अध्याय 9
- Verse 1: जब शीबा की रानी ने सुलैमान की कीर्ति सुनी, तब वह कठिन कठिन प्रश्नों से उसकी परीक्षा करने के लिये यरूशलेम को चली। वह बहुत भारी दल और मसालों और बहुत सोने और मणि से लदे ऊँट साथ लिये हुए आई, और सुलैमान के पास पहुँचकर उससे अपने मन की सब बातों के विषय बातें कीं।
- Verse 2: सुलैमान ने उसके सब प्रश्नों का उत्तर दिया, कोई बात सुलैमान की बुद्धि से ऐसी बाहर न रही कि वह उसे न बता सके।
- Verse 3: जब शीबा की रानी ने सुलैमान की बुद्धिमानी और उसका बनाया हुआ भवन,
- Verse 4: और उसकी मेज पर का भोजन देखा, और उसके कर्मचारी किस रीति बैठते, और उसके टहलुए किस रीति खड़े रहते और कैसे कैसे कपड़े पहिने रहते हैं, और उसके पिलानेवाले कैसे हैं और वे कैसे कपड़े पहिने हैं, और वह कैसी चढ़ाई है जिससे वह यहोवा के भवन को जाया करता है, जब उसने यह सब देखा, तब वह चकित हो गई।
- Verse 5: तब उसने राजा से कहा, “मैं ने तेरे कामों और बुद्धिमानी की जो कीर्ति अपने देश में सुनी वह सच ही है।
- Verse 6: परन्तु जब तक मैं ने आप ही आकर अपनी आँखों से यह न देखा, तब तक मैं ने उनकी प्रतीति न की; परन्तु तेरी बुद्धि की आधी बड़ाई भी मुझे न बताई गई थी; तू उस कीर्ति से बढ़कर है जो मैं ने सुनी थी।
- Verse 7: धन्य हैं तेरे जन, धन्य हैं तेरे ये सेवक, जो नित्य तेरे सम्मुख उपस्थित रहकर तेरी बुद्धि की बातें सुनते हैं।
- Verse 8: धन्य है तेरा परमेश्वर यहोवा, जो तुझ से ऐसा प्रसन्न हुआ कि तुझे अपनी राजगद्दी पर इसलिये विराजमान किया कि तू अपने परमेश्वर यहोवा की ओर से राज्य करे; तेरा परमेश्वर जो इस्राएल से प्रेम करके उन्हें सदा के लिये स्थिर करना चाहता था, इसी कारण उसने तुझे न्याय और धर्म करने को उनका राजा बना दिया।”
- Verse 9: उसने राजा को एक सौ बीस किक्कार सोना, बहुत सा सुगन्धद्रव्य, और मणि दिए; जैसे सुगन्धद्रव्य शीबा की रानी ने राजा सुलैमान को दिए, वैसे देखने में नहीं आए।
- Verse 10: फिर हूराम और सुलैमान दोनों के जहाजी जो ओपीर से सोना लाते थे, वे चन्दन की लकड़ी और मणि भी लाते थे।
- Verse 11: राजा ने चन्दन की लकड़ी से यहोवा के भवन और राजभवन के लिये चबूतरे और गायकों के लिये वीणाएँ और सारंगियाँ बनवाईं; ऐसी वस्तुएँ उससे पहले यहूदा देश में न देख पड़ी थीं।
- Verse 12: फिर शीबा की रानी ने जो कुछ चाहा वह राजा सुलैमान ने उसको उसकी इच्छा के अनुसार दिया; यह उससे अधिक था, जो वह राजा के पास ले आई थी। तब वह अपने जनों समेत अपने देश को लौट गई।
- Verse 13: जो सोना प्रति वर्ष सुलैमान के पास पहुँचा करता था, उसका तौल छ: सौ छियासठ किक्कार था।
- Verse 14: यह उस से अधिक था जो सौदागर और व्यापारी लाते थे; और अरब देश के सब राजा और देश के अधिपति भी सुलैमान के पास सोना–चाँदी लाते थे।
- Verse 15: राजा सुलैमान ने सोना गढ़ाकर दो सौ बड़ी बड़ी ढालें बनवाईं; एक एक ढाल में छ: छ: सौ शेकेल गढ़ा हुआ सोना लगा।
- Verse 16: फिर उसने सोना गढ़ाकर तीन सौ छोटी ढालें और भी बनवाईं; एक एक छोटी ढाल में तीन सौ शेकेल सोना लगा, और राजा ने उनको लबानोनी वन नामक भवन में रख दिया।
- Verse 17: राजा ने हाथीदाँत का एक बड़ा सिंहासन भी बनाया और चोखे सोने से मढ़ाया।
- Verse 18: उस सिंहासन में छ: सीढ़ियाँ और सोने का एक पायदान था; ये सब सिंहासन से जुड़े थे, और बैठने के स्थान के दोनों ओर टेक लगी थी और दोनों टेकों के पास एक एक सिंह खड़ा हुआ बना था।
- Verse 19: छहों सीढ़ियों के दोनों ओर एक एक सिंह खड़ा हुआ बना था, वे सब बारह हुए। किसी राज्य में ऐसा कभी न बना।
- Verse 20: राजा सुलैमान के पीने के सब पात्र सोने के थे, और लबानोनी वन नामक भवन के सब पात्र भी चोखे सोने के थे; सुलैमान के दिनों में चाँदी का कोई मूल्य न था।
- Verse 21: क्योंकि हूराम के जहाजियों के संग राजा के जहाज तर्शीश को जाते थे; और तीन तीन वर्ष के बाद तर्शीश के ये जहाज सोना, चाँदी, हाथीदाँत, बन्दर और मोर लेकर आते थे।
- Verse 22: यों राजा सुलैमान धन और बुद्धि में पृथ्वी के सब राजाओं से बढ़कर हो गया।
- Verse 23: पृथ्वी के सब राजा सुलैमान की उस बुद्धि की बातें सुनने को जो परमेश्वर ने उसके मन में उपजाई थीं उसका दर्शन करना चाहते थे।
- Verse 24: वे प्रति वर्ष अपनी अपनी भेंट अर्थात् चाँदी और सोने के पात्र, वस्त्र–शस्त्र, सुगन्धद्रव्य, घोड़े और खच्चर ले आते थे।
- Verse 25: अपने घोड़ों और रथों के लिये सुलैमान के चार हज़ार घुड़साल और बारह हज़ार घुड़सवार भी थे, जिनको उसने रथों के नगरों में और यरूशलेम में राजा के पास ठहरा रखा।
- Verse 26: वह महानद से ले पलिश्तियों के देश और मिस्र की सीमा तक के सब राजाओं पर प्रभुता करता था।
- Verse 27: राजा ने ऐसा किया कि बहुतायत के कारण यरूशलेम में चाँदी का मूल्य पत्थरों का सा और देवदारु का मूल्य नीचे के देश के गूलरों का सा हो गया।
- Verse 28: लोग मिस्र से और अन्य सभी देशों से सुलैमान के लिये घोड़े लाते थे।
- Verse 29: आदि से अन्त तक सुलैमान के और सब काम क्या नातान नबी की पुस्तक में, और शीलोवासी अहिय्याह की नबूवत की पुस्तक में, और नबात के पुत्र यारोबाम के विषय इद्दो दर्शी के दर्शन की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?
- Verse 30: सुलैमान ने यरूशलेम में सारे इस्राएल पर चालीस वर्ष तक राज्य किया।
- Verse 31: फिर सुलैमान अपने पुरखाओं के संग सो गया और उसको उसके पिता दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र रहूबियाम उसके स्थान पर राजा हुआ।