P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
यशायाह
अध्याय 3
- Verse 1: सुनो, प्रभु सेनाओं का यहोवा यरूशलेम और यहूदा का सब प्रकार का सहारा और सिरहाना अर्थात् अन्न का सारा आधार, और जल का सारा आधार दूर कर देगा;
- Verse 2: और वीर और योद्धा को, न्यायी और नबी को, भावी वक्ता और वृद्ध को, पचास सिपाहियों के सरदार और प्रतिष्ठित पुरुष को,
- Verse 3: मन्त्री और चतुर कारीगर को, और निपुण टोन्हे को भी दूर कर देगा।
- Verse 4: मैं लड़कों को उनके हाकिम कर दूँगा, और बच्चे उन पर प्रभुता करेंगे।
- Verse 5: प्रजा के लोग आपस में एक दूसरे पर, और हर एक अपने पड़ोसी पर अंधेर करेंगे; और जवान वृद्ध जनों से और नीच जन माननीय लोगों से असभ्यता का व्यवहार करेंगे।
- Verse 6: उस समय जब कोई पुरुष अपने पिता के घर में अपने भाई को पकड़कर कहेगा, “तेरे पास तो वस्त्र हैं, आ हमारा न्यायी हो जा और इस उजड़े देश को अपने वश में कर ले;”
- Verse 7: तब वह शपथ खाकर कहेगा, “मैं चंगा करनेहारा न हूँगा; क्योंकि मेरे घर में न तो रोटी है और न कपड़े; इसलिये तुम मुझे प्रजा का न्यायी नहीं नियुक्त कर सकोगे।”
- Verse 8: यरूशलेम तो डगमगाया और यहूदा गिर गया है; क्योंकि उनके वचन और उनके काम यहोवा के विरुद्ध हैं, जो उसकी तेजोमय आँखों के सामने बलवा करनेवाले ठहरे हैं।
- Verse 9: उनका चेहरा भी उनके विरुद्ध साक्षी देता है; वे सदोमियों के समान अपने पाप को आप ही बखानते और नहीं छिपाते हैं। उन पर हाय! क्योंकि उन्होंने अपनी हानि आप ही की है।
- Verse 10: धर्मियों से कहो कि उनका भला होगा, क्योंकि वे अपने कामों का फल प्राप्त करेंगे।
- Verse 11: दुष्ट पर हाय! उसका बुरा होगा, क्योंकि उसके कामों का फल उसको मिलेगा।
- Verse 12: मेरी प्रजा पर बच्चे अंधेर करते और स्त्रियाँ उन पर प्रभुता करती हैं। हे मेरी प्रजा, तेरे अगुवे तुझे भटकाते हैं, और तेरे चलने का मार्ग भुला देते हैं।
- Verse 13: यहोवा देश देश के लोगों से मुक़द्दमा लड़ने और उनका न्याय करने के लिये खड़ा है।
- Verse 14: यहोवा अपनी प्रजा के वृद्ध और हाकिमों के साथ यह विवाद करता है : “तुम ही ने बारी की दाख खा डाली है, और दीन लोगों का धन लूटकर तुम ने अपने घरों में रखा है।”
- Verse 15: सेनाओं के प्रभु यहोवा की यह वाणी है, “तुम क्यों मेरी प्रजा को दलते, और दीन लोगों को पीस डालते हो!”
- Verse 16: यहोवा ने यह भी कहा है, “क्योंकि सिय्योन की स्त्रियाँ घमण्ड करतीं और सिर ऊँचे किये आँखें मटकातीं और घुँघरुओं को छमछमाती हुई ठुमुक ठुमुक चलती हैं,
- Verse 17: इसलिये प्रभु यहोवा उनके सिर को गंजा करेगा, और उनके तन को उघरवाएगा।”
- Verse 18: उस समय प्रभु घुँघरुओं, जालियों,
- Verse 19: चंद्रहारों, झुमकों, कड़ों, घूँघटों,
- Verse 20: पगड़ियों, पैकरियों, पटुकों, सुगन्धपात्रों, गण्डों,
- Verse 21: अँगूठियों, नथों,
- Verse 22: सुन्दर वस्त्रों, कुर्तियों, चद्दरों, बटुओं,
- Verse 23: दर्पणों, मलमल के वस्त्रों, बुन्दियों, दुपट्टों इन सभों की शोभा को दूर करेगा।
- Verse 24: सुगन्ध के बदले सड़ाहट, सुन्दर कर्धनी के बदले बन्धन की रस्सी, गुँथे हुए बालों के बदले गंजापन, सुन्दर पटुके के बदले टाट की पेटी, और सुन्दरता के बदले दाग होंगे।
- Verse 25: तेरे पुरुष तलवार से, और शूरवीर युद्ध में मारे जाएँगे।
- Verse 26: और उसके फाटकों में साँस भरना और विलाप करना होगा; और वह भूमि पर अकेली बैठी रहेगी।