P. O. C ബൈബിള്
पुराना नियम
1 शमूएल
अध्याय 18
- Verse 1: जब वह शाऊल से बातें कर चुका, तब योनातान का मन दाऊद पर ऐसा लग गया, कि योनातान उसे अपने प्राण के समान प्यार करने लगा।
- Verse 2: और उस दिन शाऊल ने उसे अपने पास रखा, और पिता के घर लौटने न दिया।
- Verse 3: तब योनातान ने दाऊद से वाचा बाँधी, क्योंकि वह उसको अपने प्राण के समान प्यार करता था।
- Verse 4: योनातान ने अपना बागा जो वह स्वयं पहिने था उतारकर अपने वस्त्र समेत दाऊद को दे दिया, वरन् अपनी तलवार और धनुष और कटिबन्ध भी उसको दे दिए।
- Verse 5: और जहाँ कहीं शाऊल दाऊद को भेजता था वहाँ वह जाकर बुद्धिमानी के साथ काम करता था; अत: शाऊल ने उसे योद्धाओं का प्रधान नियुक्त किया। और समस्त प्रजा के लोग और शाऊल के कर्मचारी उससे प्रसन्न थे।
- Verse 6: जब दाऊद उस पलिश्ती को मारकर लौट रहा था, और वे सब लोग भी आ रहे थे, तब सब इस्राएली नगरों से स्त्रियाँ डफ और तिकोने बाजे लिए हुए, आनन्द के साथ गाती और नाचती हुई, शाऊल राजा के स्वागत में निकलीं।
- Verse 7: और वे स्त्रियाँ नाचती हुई एक दूसरे के साथ यह गाती गईं, “शाऊल ने तो हज़ारों को, परन्तु दाऊद ने लाखों को मारा है।”
- Verse 8: तब शाऊल अति क्रोधित हुआ, और यह बात उसको बुरी लगी; और वह कहने लगा, “उन्होंने दाऊद के लिये तो लाखों और मेरे लिये हज़ारों ही ठहराया; इसलिये अब राज्य को छोड़ उसको अब क्या मिलना बाकी है?”
- Verse 9: उस दिन से शाऊल दाऊद की ताक में लगा रहा।
- Verse 10: दूसरे दिन परमेश्वर की ओर से एक दुष्ट आत्मा शाऊल पर बल से उतरा, और वह अपने घर के भीतर नबूवत करने लगा; दाऊद प्रतिदिन के समान अपने हाथ से बजा रहा था, और शाऊल अपने हाथ में अपना भाला लिए हुए था;
- Verse 11: तब शाऊल ने यह सोचकर कि “मैं ऐसा मारूँगा कि भाला दाऊद को बेधकर भीत में धँस जाए,” भाले को चलाया, परन्तु दाऊद उसके सामने से दोनों बार हट गया।
- Verse 12: शाऊल दाऊद से डरा करता था, क्योंकि यहोवा दाऊद के साथ था और शाऊल के पास से अलग हो गया था।
- Verse 13: शाऊल ने उसको अपने पास से अलग करके सहस्रपति किया, और वह प्रजा के सामने आया जाया करता था।
- Verse 14: और दाऊद अपनी समस्त चाल में बुद्धिमानी दिखाता था; और यहोवा उसके साथ साथ था।
- Verse 15: जब शाऊल ने देखा कि वह बहुत बुद्धिमान है, तब वह उससे डर गया।
- Verse 16: परन्तु इस्राएल और यहूदा के समस्त लोग दाऊद से प्रेम रखते थे; क्योंकि वह उनके आगे आगे आया जाया करता था।
- Verse 17: शाऊल ने यह सोचकर कि “मेरा हाथ नहीं, वरन् पलिश्तियों ही का हाथ दाऊद पर पड़े,” उससे कहा, “सुन, मैं अपनी बड़ी बेटी मेरब से तेरा विवाह कर दूँगा; इतना कर कि तू मेरे लिये वीरता के साथ यहोवा की ओर से युद्ध कर।”
- Verse 18: दाऊद ने शाऊल से कहा, “मैं क्या हूँ, और मेरा जीवन क्या है, और इस्राएल में मेरे पिता का कुल क्या है, कि मैं राजा का दामाद हो जाऊँ?”
- Verse 19: जब समय आ गया कि शाऊल की बेटी मेरब का दाऊद से विवाह किया जाए, तब वह महोलाई अद्रीएल से ब्याह दी गई।
- Verse 20: शाऊल की बेटी मीकल दाऊद से प्रीति रखने लगी; और जब इस बात का समाचार शाऊल को मिला, तब वह प्रसन्न हुआ।
- Verse 21: शाऊल तो सोचता था कि वह उसके लिये फन्दा हो, और पलिश्तियों का हाथ उस पर पड़े। और शाऊल ने दाऊद से कहा, “अब की बार तू अवश्य ही मेरा दामाद हो जाएगा।”
- Verse 22: फिर शाऊल ने अपने कर्मचारियों को आज्ञा दी, “दाऊद से छिपकर ऐसी बातें करो, कि ‘सुन, राजा तुझ से प्रसन्न है, और उसके सब कर्मचारी भी तुझ से प्रेम रखते हैं; इसलिये अब तू राजा का दामाद हो जा’।”
- Verse 23: तब शाऊल के कर्मचारियों ने दाऊद से ऐसी ही बातें कहीं। परन्तु दाऊद ने कहा “मैं तो निर्धन और तुच्छ मनुष्य हूँ, फिर क्या तुम्हारी दृष्टि में राजा का दामाद होना छोटी बात है?”
- Verse 24: जब शाऊल के कर्मचारियों ने उसे बताया कि दाऊद ने ऐसी ऐसी बातें कहीं।
- Verse 25: तब शाऊल ने कहा, “तुम दाऊद से यों कहो, ‘राजा कन्या का मोल तो कुछ नहीं चाहता, केवल पलिश्तियों की एक सौ खलड़ियाँ चाहता है, कि वह अपने शत्रुओं से बदला ले’।” शाऊल की योजना यह थी कि पलिश्तियों से दाऊद को मरवा डाले।
- Verse 26: जब उसके कर्मचारियों ने दाऊद को ये बातें बताईं, तब वह राजा का दामाद होने को प्रसन्न हुआ। जब विवाह के कुछ दिन रह गए,
- Verse 27: तब दाऊद अपने जनों को संग लेकर चला, और पलिश्तियों के दो सौ पुरुषों को मारा; तब दाऊद उनकी खलड़ियों को ले आया, और वे राजा को गिन गिन कर दी गईं, इसलिये कि वह राजा का दामाद हो जाए। अत: शाऊल ने अपनी बेटी मीकल का उससे विवाह कर दिया।
- Verse 28: जब शाऊल ने देखा, और निश्चय जाना कि यहोवा दाऊद के साथ है, और मेरी बेटी मीकल उस से प्रेम रखती है,
- Verse 29: तब शाऊल दाऊद से और भी डर गया। इसलिये शाऊल सदा के लिये दाऊद का बैरी बन गया।
- Verse 30: फिर पलिश्तयों के प्रधान निकल आए, और जब जब वे निकल आए तब तब दाऊद ने शाऊल के अन्य सब कर्मचारियों से अधिक बुद्धिमानी दिखाई; इससे उसका नाम बहुत बड़ा हो गया।