पवित्र बाइबिल
पुराना नियम
गिनती
अध्याय 16
- Verse 1: कोरह जो लेवी का परपोता, कहात का पोता, और यिसहार का पुत्र था, वह एलीआब के पुत्र दातान और अबीराम, और पेलेत के पुत्र ओन,
- Verse 2: इन तीनों रूबेनियों से मिलकर मण्डली के ढाई सौ प्रधान, जो सभासद और नामी थे, उनको संग लिया;
- Verse 3: और वे मूसा और हारून के विरुद्ध उठ खड़े हुए, और उनसे कहने लगे, “तुम ने बहुत किया, अब बस करो; क्योंकि सारी मण्डली का एक एक मनुष्य पवित्र है, और यहोवा उनके मध्य में रहता है; इसलिये तुम यहोवा की मण्डली में ऊँचे पदवाले क्यों बन बैठे हो?”
- Verse 4: यह सुनकर मूसा अपने मुँह के बल गिरा;
- Verse 5: फिर उसने कोरह और उसकी सारी मण्डली से कहा, “सबेरे यहोवा दिखला देगा कि उसका कौन है, और पवित्र कौन है, और उसको अपने समीप बुला लेगा; जिसको वह आप चुन लेगा उसी को अपने समीप बुला भी लेगा।
- Verse 6: इसलिये, हे कोरह, तुम अपनी सारी मण्डली समेत यह करो, अर्थात् अपना अपना धूपदान ठीक करो;
- Verse 7: और कल उनमें आग रखकर यहोवा के सामने धूप देना, तब जिसको यहोवा चुन ले वही पवित्र ठहरेगा। हे लेवियो, तुम भी बड़ी बड़ी बातें करते हो, अब बस करो।”
- Verse 8: फिर मूसा ने कोरह से कहा, “हे लेवियो, सुनो,
- Verse 9: क्या यह तुम्हें छोटी बात जान पड़ती है कि इस्राएल के परमेश्वर ने तुम को इस्राएल की मण्डली से अलग करके अपने निवास की सेवा करने, और मण्डली के सामने खड़े होकर उसकी भी सेवा टहल करने के लिये अपने समीप बुला लिया है;
- Verse 10: और तुझे और तेरे सब लेवी भाइयों को भी अपने समीप बुला लिया है? फिर भी तुम याजक पद के भी खोजी हो?
- Verse 11: और इसी कारण तू ने अपनी सारी मण्डली को यहोवा के विरुद्ध इकट्ठी किया है; हारून कौन है कि तुम उस पर बुड़बुड़ाते हो?”
- Verse 12: फिर मूसा ने एलीआब के पुत्र दातान और अबीराम को बुलवा भेजा; और उन्होंने कहा, “हम तेरे पास नहीं आएँगे।
- Verse 13: क्या यह एक छोटी बात है कि तू हम को ऐसे देश से जिसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं इसलिये निकाल लाया है, कि हमें जंगल में मार डाले, फिर क्या तू हमारे ऊपर प्रधान भी बनकर अधिकार जताता है?
- Verse 14: फिर तू ने हमें ऐसे देश में जहाँ दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं नहीं पहुँचाया, और न हमें खेतों और दाख की बारियों के अधिकारी किया। क्या तू इन लोगों की आँखों में धूल डालेगा? हम तो नहीं आएँगे।”
- Verse 15: तब मूसा का कोप बहुत भड़क उठा, और उसने यहोवा से कहा, “उन लोगों की भेंट की ओर दृष्टि न कर। मैं ने तो उनसे एक गदहा नहीं लिया, और न उनमें से किसी की हानि की है।”
- Verse 16: तब मूसा ने कोरह से कहा, “कल तू अपनी सारी मण्डली को साथ लेकर हारून के साथ यहोवा के सामने हाज़िर होना;
- Verse 17: और तुम सब अपना अपना धूपदान लेकर उनमें धूप देना, फिर अपना अपना धूपदान जो सब समेत ढाई सौ होंगे यहोवा के सामने ले जाना; विशेष करके तू और हारून अपना अपना धूपदान ले जाना।”
- Verse 18: इसलिये उन्होंने अपना अपना धूपदान लेकर और उनमें आग रखकर उन पर धूप डाला; और मूसा और हारून के साथ मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खड़े हुए।
- Verse 19: और कोरह ने सारी मण्डली को उनके विरुद्ध मिलापवाले तम्बू के द्वार पर इकट्ठा कर लिया। तब यहोवा का तेज सारी मण्डली को दिखाई दिया।
- Verse 20: तब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,
- Verse 21: “उस मण्डली के बीच में से अलग हो जाओ कि मैं उन्हें पल भर में भस्म कर डालूँ।”
- Verse 22: तब वे मुँह के बल गिरके कहने लगे, “हे ईश्वर, हे सब प्राणियों के आत्माओं के परमेश्वर, क्या एक पुरुष के पाप के कारण तेरा क्रोध सारी मण्डली पर होगा?”
- Verse 23: यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 24: “मण्डली के लोगों से कह कि कोरह, दातान, और अबीराम के तम्बुओं के आसपास से हट जाओ।”
- Verse 25: तब मूसा उठकर दातान और अबीराम के पास गया; और इस्राएलियों के वृद्ध लोग उसके पीछे पीछे गए।
- Verse 26: और उस ने मण्डली के लोगों से कहा, “तुम उन दुष्ट मनुष्यों के डेरों के पास से हट जाओ, और उनकी कोई वस्तु न छूओ, कहीं ऐसा न हो कि तुम भी उनके सब पापों में फँसकर मिट जाओ।”
- Verse 27: यह सुन के वे कोरह, दातान और अबीराम के तम्बुओं के आसपास से हट गए; परन्तु दातान और अबीराम निकलकर अपनी पत्नियों, बेटों, और बाल–बच्चों समेत अपने अपने डेरे के द्वार पर खड़े हुए।
- Verse 28: तब मूसा ने कहा, “इस से तुम जान लोगे की यहोवा ने मुझे भेजा है कि यह सब काम करूँ, क्योंकि मैं ने अपनी इच्छा से कुछ नहीं किया।
- Verse 29: यदि उन मनुष्यों की मृत्यु और सब मनुष्यों के समान हो,और उनका दण्ड सब मनुष्यों के समान हो, तब जानो कि मैं यहोवा का भेजा हुआ नहीं हूँ।
- Verse 30: परन्तु यदि यहोवा अपनी अनोखी शक्ति प्रकट करे, और पृथ्वी अपना मुँह पसारकर उनको, और उनका सब कुछ निगल जाए, और वे जीते जी अधोलोक में जा पड़ें, तो तुम समझ लो कि इन मनुष्यों ने यहोवा का अपमान किया है।”
- Verse 31: वह ये सब बातें कह ही चुका था कि भूमि उन लोगों के पाँव के नीचे फट गई;
- Verse 32: और पृथ्वी ने अपना मुँह खोल दिया और उनका, और उनके घरद्वार का सामान, और कोरह के सब मनुष्यों और उनकी सारी सम्पत्ति को भी निगल लिया।
- Verse 33: और वे और उनका सारा घरबार जीवित ही अधोलोक में जा पड़े; और पृथ्वी ने उनको ढाँप लिया, और वे मण्डली के बीच में से नष्ट हो गए।
- Verse 34: और जितने इस्राएली उनके चारों ओर थे वे उनका चिल्लाना सुन यह कहते हुए भागे कि कहीं पृथ्वी हम को भी निगल न ले!
- Verse 35: तब यहोवा के पास से आग निकली, और उन ढाई सौ धूप चढ़ानेवालों को भस्म कर डाला।
- Verse 36: तब यहोवा ने मूसा से कहा,
- Verse 37: “हारून याजक के पुत्र एलीआज़ार से कह कि उन धूपदानों को आग में से उठा ले; और आग के अंगारों को उधर ही छितरा दे, क्योंकि वे पवित्र हैं।
- Verse 38: जिन्होंने पाप करके अपने ही प्राणों की हानि की है, उनके धूपदानों के पत्तर पीट पीटकर बनाए जाएँ जिससे कि वह वेदी के मढ़ने के काम आए; क्योंकि उन्होंने यहोवा के सामने रखा था; इससे वे पवित्र हैं। इस प्रकार वह इस्राएलियों के लिये एक निशान ठहरेगा।”
- Verse 39: इसलिये एलीआज़ार याजक ने उन पीतल के धूपदानों को, जिनमें उन जले हुए मनुष्यों ने धूप चढ़ाया था, लेकर उनके पत्तर पीटकर वेदी के मढ़ने के लिये बनवा दिए,
- Verse 40: कि इस्राएलियों को इस बात का स्मरण रहे कि कोई दूसरा, जो हारून के वंश का न हो, यहोवा के सामने धूप चढ़ाने को समीप न जाए, ऐसा न हो कि वह भी कोरह और उसकी मण्डली के समान नष्ट हो जाए, जैसे कि यहोवा ने मूसा के द्वारा उसको आज्ञा दी थी।
- Verse 41: दूसरे दिन इस्राएलियों की सारी मण्डली यह कहकर मूसा और हारून पर बुड़बुड़ाने लगी कि यहोवा की प्रजा को तुम ने मार डाला है।
- Verse 42: और जब मण्डली के लोग मूसा और हारून के विरुद्ध इकट्ठे हो रहे थे, तब उन्होंने मिलापवाले तम्बू की ओर दृष्टि की; और देखा कि बादल ने उसे छा लिया है, और यहोवा का तेज दिखाई दे रहा है।
- Verse 43: तब मूसा और हारून मिलापवाले तम्बू के सामने आए,
- Verse 44: तब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,
- Verse 45: “तुम उस मण्डली के लोगों के बीच से हट जाओ कि मैं उन्हें पल भर में भस्म कर डालूँ।” तब वे मुँह के बल गिरे।
- Verse 46: और मूसा ने हारून से कहा, “धूपदान को लेकर उसमें वेदी पर से आग रखकर उस पर धूप डाल, मण्डली के पास फुर्ती से जाकर उसके लिए प्रायश्चित्त कर; क्योंकि यहोवा का कोप अत्यन्त भड़का है, और मरी फैलने लगी है।”
- Verse 47: मूसा की आज्ञा के अनुसार हारून धूपदान लेकर मण्डली के बीच में दौड़ा गया; और यह देखकर कि लोगों में मरी फैलने लगी है, उसने धूप जलाकर लोगों के लिये प्रायश्चित्त किया।
- Verse 48: और वह मुर्दों और जीवित के मध्य में खड़ा हुआ; तब मरी थम गई।
- Verse 49: और जो कोरह के संग भागी होकर मर गए थे, उन्हें छोड़ जो लोग इस मरी से मर गए वे चौदह हज़ार सात सौ थे।
- Verse 50: तब हारून मिलापवाले तम्बू के द्वार पर मूसा के पास लौट गया, और मरी थम गई।